
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता खड़गे ने इस मुद्दे को भावुक अंदाज में उठाते हुए कहा कि वह दलित होने के नाम पर कभी किसी से मदद की गुहार नहीं लगाते, लेकिन उनके साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया जाना बेहद पीड़ादायक है।
खड़गे ने सदन में कहा कि उन्होंने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक, रैली में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और उन्होंने अपने भाषण में किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ कोई बात नहीं कही, बल्कि सरकार से जुड़े मुद्दों को उठाया था। उनका आरोप है कि उनके कार्यक्रम के बाद कुछ बीजेपी समर्थित लोगों ने मंच पर हवन कर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया।
‘दलित हूं, मेरी मदद करो, ये कभी नहीं गिड़गिड़ाया’
खड़गे ने कहा कि उन्होंने कभी सदन में यह कहकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश नहीं की कि वह दलित हैं और उनकी मदद की जाए। उन्होंने कहा कि उनमें संघर्ष करने की ताकत है और वह अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं।
लेकिन मंच के शुद्धिकरण को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में किसी व्यक्ति के साथ सिर्फ उसकी जाति की वजह से इस तरह का व्यवहार स्वीकार किया जा सकता है। खड़गे ने इसे अपने अपमान और छुआछूत से जोड़ते हुए बीजेपी से सवाल किया कि संविधान की रक्षा कैसे की जा रही है।
नड्डा ने कहा- बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती
खड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए राज्यसभा के सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे ने जो मुद्दा उठाया है, वह दुखद है। नड्डा ने स्पष्ट किया कि बीजेपी ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती।
उन्होंने कहा कि अगर मौके पर इस तरह की कोई घटना हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। नड्डा ने भरोसा दिलाया कि मामले की तहकीकात होगी और अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नड्डा ने यह भी कहा कि खड़गे की भावनाओं का वह सम्मान करते हैं और उनकी भावनाएं आहत होना सभी के लिए खेद का विषय है। हालांकि, उन्होंने खड़गे से बीजेपी पर सीधे तौर पर बार-बार आरोप लगाने से बचने की अपील भी की।
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क्या है हल्द्वानी के रामलीला मैदान का पूरा विवाद?
दरअसल, 8 अगस्त को मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद रैली’ को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद यानी 10 अगस्त को एक संगठन की ओर से मैदान में हवन और गंगाजल का छिड़काव कर कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया।
संगठन की ओर से दावा किया गया कि रामलीला मैदान सनातन परंपरा से जुड़े कार्यक्रमों का स्थल है और रैली के दौरान इसकी पवित्रता प्रभावित हुई। इसी वजह से शुद्धिकरण की बात कही गई।
वहीं कांग्रेस ने इस पूरे विवाद से जुड़े कुछ वीडियो को AI से तैयार बताया और आरोपों को खारिज किया। अब मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर संसद में भी चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल नड्डा के जांच के आश्वासन के बाद इस विवाद में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हल्द्वानी में मंच के शुद्धिकरण के पीछे वास्तव में कौन लोग थे और क्या उनका किसी राजनीतिक संगठन से संबंध था।



