
Father’s Day Special: फादर्स डे के अवसर पर जहां दुनिया भर में पिता के योगदान को याद किया जा रहा है, वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन मंदाविया ने समाज में प्रचलित उस सोच पर सवाल उठाया है, जिसमें आज भी पिता की भूमिका को केवल परिवार का खर्च उठाने तक सीमित मान लिया जाता है। उनका कहना है कि आधुनिक दौर में पिता सिर्फ आर्थिक जिम्मेदारियां नहीं निभा रहे, बल्कि बच्चों की परवरिश और परिवार की देखभाल में भी सक्रिय भूमिका अदा कर रहे हैं।
डॉ. मंदाविया के अनुसार, आज के पिता ऑफिस की व्यस्तताओं के बावजूद घर के कामों में सहयोग करते हैं, बच्चों का होमवर्क करवाते हैं, रात में जागकर उनकी देखभाल करते हैं और जरूरत पड़ने पर डायपर बदलने से लेकर उन्हें सुलाने तक की जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद अक्सर उनके योगदान को वह पहचान नहीं मिलती, जिसके वे हकदार हैं।
‘बच्चे के पापा करते ही क्या हैं?’ जैसी सोच पर उठाए सवाल
विशेषज्ञ का कहना है कि समाज में आज भी कई बार यह सवाल सुनने को मिलता है कि “बच्चे के पापा करते ही क्या हैं?” जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है। पिता न केवल परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी परिवार के मजबूत स्तंभ बने रहते हैं।
उनके मुताबिक, एक पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत करता है। वह परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देता है और कई बार अपनी इच्छाओं व सपनों को भी पीछे छोड़ देता है ताकि अपने बच्चों, पत्नी और माता-पिता की जरूरतें पूरी कर सके।
पिता भी भावनाएं रखते हैं
डॉ. मंदाविया ने कहा कि समाज अक्सर पुरुषों और विशेष रूप से पिताओं को हमेशा मजबूत बने रहने की अपेक्षा से देखता है। लेकिन सच्चाई यह है कि पिता भी भावनाएं रखते हैं, उन्हें भी तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कई बार पिता अपनी परेशानियों और भावनाओं को परिवार के सामने जाहिर नहीं करते, क्योंकि उन्हें बचपन से ही मजबूत बने रहने की सीख दी जाती है। वे अपनी चिंताओं को खुद तक सीमित रखते हैं ताकि परिवार के अन्य सदस्य सुरक्षित और निश्चिंत महसूस कर सकें।
बच्चों के लिए होते हैं सुपरहीरो
विशेषज्ञ के अनुसार, बच्चों की नजर में पिता किसी सुपरहीरो से कम नहीं होते। वे हर परिस्थिति में परिवार का सहारा बनते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराकर परिवार को संभालने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि उनके प्रयासों और त्याग को पहचानना बेहद जरूरी है।
फादर्स डे पर सम्मान और आभार जताने की अपील
फादर्स डे के अवसर पर डॉ. मंदाविया ने लोगों से अपील की कि वे अपने पिता या जीवनसाथी के योगदान को समझें और उनके प्रति सम्मान व आभार व्यक्त करें। उन्होंने कहा कि कभी-कभी एक छोटा सा धन्यवाद, एक प्रशंसा या प्यार भरे कुछ शब्द भी किसी पिता के लिए बेहद खास हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ पिता की भूमिका भी बदली है। ऐसे में समाज को भी अपनी सोच बदलने की जरूरत है और बच्चों की परवरिश में पिता के योगदान को समान महत्व देना चाहिए।



