Sambhal Violence: संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश, पूर्व नियोजित साजिश का दावा; कई बड़े खुलासे

Sambhal Violence: उत्तर प्रदेश विधानसभा में संभल हिंसा पर गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट बुधवार को सदन के पटल पर रखी गई। रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताया गया है। आयोग का कहना है कि सर्वे को लेकर लोगों के बीच भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र हुई और हालात हिंसक हो गए।

क्या कहती है आयोग की रिपोर्ट?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय आयोग ने अपनी जांच में कहा है कि हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि इसके पीछे पहले से की गई तैयारी और भीड़ जुटाने की कोशिशें थीं। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों को सर्वे को लेकर भड़काया गया और माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाया गया।

भीड़ हथियार और पत्थरों के साथ पहुंची

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौके पर पहुंची भीड़ केवल विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं आई थी। जांच के मुताबिक, कई लोग पत्थरों और हथियारों के साथ पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन पर पथराव हुआ, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिससे पूरे इलाके में हिंसा फैल गई।

चार लोगों की मौत, पुलिस पर भी हमला

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मृतकों को लगी गोलियां पुलिस की नहीं थीं। इसके अलावा 28 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें सात को गोली लगी। रिपोर्ट में उपद्रवियों द्वारा पुलिस के हथियार और सरकारी सामान लूटने की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है।

कई लोगों की भूमिका का उल्लेख

जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल समेत कई लोगों की भूमिका का उल्लेख किया है। आयोग ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर इन व्यक्तियों की भूमिका दर्ज की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा से पहले भीड़ जुटाने और माहौल बनाने के प्रयास किए गए थे। यह आयोग के निष्कर्ष हैं और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाएं अलग हो सकती हैं।

भविष्य के लिए आयोग की सिफारिशें

रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायालय के आदेशों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए और किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने से रोका जाए। आयोग ने कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने तथा विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए भी कई सिफारिशें की हैं।

आगे क्या?

विधानसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद अब इस पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है। आयोग के निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। हालांकि रिपोर्ट में जिन व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं के बाद ही तय होंगे।

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