
International News: संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत ने एक बार फिर अपने स्पष्ट और सैद्धांतिक रुख को मजबूती से सामने रखा। भारत ने वैश्विक सुरक्षा, रणनीतिक स्थिरता और परमाणु हथियारों की नई दौड़ को रोकने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया को एक ऐसे ढांचे की जरूरत है जो सभी देशों को परमाणु खतरे से पूरी तरह सुरक्षा प्रदान कर सके।
भारत ने अपने राष्ट्रीय वक्तव्य में कहा कि उभरती हुई तकनीकों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), का सैन्य उपयोग केवल मानव नियंत्रण में ही होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की अनियंत्रित या अस्थिर स्थिति से बचा जा सके।
भारत ने दोहराई वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग
निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत के स्थायी मिशन ने स्पष्ट किया कि भारत लंबे समय से वैश्विक, सत्यापन-योग्य और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थक रहा है। भारत ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते की आवश्यकता पर बल दिया जो गैर-परमाणु हथियार संपन्न देशों को परमाणु हथियारों के उपयोग या उनकी धमकी से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे।
भारत ने कहा कि यह सुरक्षा गारंटी कानूनी रूप से बाध्यकारी, सार्वभौमिक और बिना किसी शर्त के होनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर विश्वास और स्थिरता कायम की जा सके।
नो-फर्स्ट-यूज़ नीति पर भारत का दोहराया गया रुख
भारत ने अपने परमाणु सिद्धांत के तहत ‘नो-फर्स्ट-यूज़’ (NFU) नीति को एक बार फिर स्पष्ट किया। भारत ने कहा कि वह परमाणु हथियारों का उपयोग पहले नहीं करेगा और न ही गैर-परमाणु देशों के खिलाफ इनका प्रयोग करेगा।
इसके साथ ही भारत ने वैश्विक स्तर पर सभी परमाणु संपन्न देशों के बीच एक ‘ग्लोबल नो-फर्स्ट-यूज़’ समझौते की वकालत की, ताकि दुनिया में परमाणु जोखिम को कम किया जा सके और आपसी भरोसा बढ़ाया जा सके।
भारत ने जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में दोहराई प्रतिबद्धता
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत ने जोर दिया कि उसका उद्देश्य परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया का निर्माण करना है, जहां सुरक्षा और स्थिरता सर्वोपरि हों।
भारत ने यह भी याद दिलाया कि वह लगातार संयुक्त राष्ट्र महासभा में परमाणु खतरों को कम करने और हथियारों के उपयोग पर रोक लगाने वाले प्रस्तावों का समर्थन करता रहा है।
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उभरती तकनीकों पर भी जताई चिंता
सम्मेलन में भारत ने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध और सुरक्षा परिदृश्य में एआई और अन्य उभरती तकनीकों का बढ़ता उपयोग गंभीर चुनौती बन सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि इन तकनीकों के सैन्य उपयोग पर मानव नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की गलत या अनियंत्रित कार्रवाई को रोका जा सके।
वैश्विक सुरक्षा के लिए भारत का स्पष्ट संदेश
भारत के इस वक्तव्य को वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार और संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग, नियंत्रण और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रिपोर्ट : शाश्वत तिवारी



