
Health News: आमतौर पर हमारा इम्यून सिस्टम शरीर को वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से बचाता है। लेकिन कुछ मामलों में यही प्रतिरक्षा तंत्र गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इस स्थिति को ऑटोइम्यून बीमारी कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
लगातार थकान हो सकती है बड़ा संकेत
यदि पर्याप्त आराम और नींद के बावजूद शरीर में लगातार कमजोरी और थकान बनी रहती है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर के अंदर होने वाली सूजन व्यक्ति को लंबे समय तक थका हुआ महसूस करा सकती है।
जोड़ों में दर्द और अकड़न पर रखें नजर
सुबह उठते समय हाथ-पैर या अन्य जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न महसूस होना भी चिंता का विषय हो सकता है। विशेष रूप से यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो यह रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारी का संकेत हो सकती है।
त्वचा में दिखें बदलाव तो रहें सतर्क
त्वचा पर बार-बार लाल चकत्ते, खुजली, रैशेज या असामान्य दाग दिखाई देना भी ऑटोइम्यून विकारों से जुड़ा हो सकता है। कुछ मामलों में चेहरे पर विशेष प्रकार के रैशेज भी देखने को मिलते हैं। हालांकि इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं वजह
बार-बार पेट दर्द, दस्त, गैस, पेट फूलना या भोजन पचाने में कठिनाई जैसी समस्याएं भी कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों का संकेत हो सकती हैं। यदि ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो जांच कराना जरूरी हो जाता है।
शरीर में सूजन और अन्य बदलाव
बिना किसी स्पष्ट कारण के शरीर में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, बार-बार बुखार, बाल झड़ना या मुंह में बार-बार छाले होना भी ऑटोइम्यून समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। कुछ लोगों में धूप के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता भी देखी जाती है।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ये लक्षण लगातार बने रहें या दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नियमित स्वास्थ्य जांच और जागरूकता ही ऐसी समस्याओं से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।
written by Siddhi Srivastava



