US Deportation : अमेरिका में जाने वाले भारतीयों की संख्या में गिरावट, क्या डिपोर्टेशन का डर बना बड़ी वजह?

US Deportation : अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करने वाले भारतीयों की संख्या में 69% की गिरावट दर्ज की गई है। US बॉर्डर डेटा, डिपोर्टेशन में बढ़ोतरी और ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

US Deportation : अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करने की कोशिश करने वाले भारतीयों की संख्या में पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी सीमा अधिकारियों के वित्तीय वर्ष 2026 (मई तक) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 की तुलना में ऐसे मामलों में लगभग 69 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीति और बढ़ते डिपोर्टेशन अभियान का इस बदलाव में महत्वपूर्ण योगदान है।

FY2023 के मुकाबले बड़ी गिरावट

अमेरिकी बॉर्डर अधिकारियों के रिकॉर्ड के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026 के मई तक भारतीय नागरिकों से जुड़े 20,614 एनकाउंटर दर्ज किए गए। वहीं FY2023 में यह आंकड़ा करीब 67,000 था, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक माना गया।

सबसे ज्यादा कमी अमेरिका की जमीनी सीमाओं पर देखने को मिली। मेक्सिको से लगने वाली दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर भारतीयों से जुड़े केवल 417 एनकाउंटर दर्ज हुए, जो FY2023 की तुलना में 99 प्रतिशत कम हैं। वहीं कनाडा से सटी उत्तरी सीमा पर 2,250 एनकाउंटर दर्ज किए गए, जो FY2024 की समान अवधि की तुलना में 91 प्रतिशत कम हैं।

ट्रंप प्रशासन की सख्ती का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि गैर-कानूनी इमिग्रेशन के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की कड़ी कार्रवाई ने लोगों के बीच डिपोर्टेशन का डर बढ़ाया है। राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने के बाद कई देशों के नागरिकों के साथ भारतीय भी इसकी चपेट में आए हैं।

विदेश मंत्रालय (MEA) की जून 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में 1,076 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया। इससे पहले संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 3,500 से अधिक भारतीयों को अमेरिका से वापस भेजा गया, जो पिछले 16 वर्षों में सबसे अधिक संख्या थी।

महंगी और जोखिमभरी यात्रा से बढ़ी दूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका तक गैर-कानूनी रास्तों से पहुंचना बेहद महंगा और जोखिमभरा हो चुका है। कड़ी निगरानी, गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन की बढ़ती संभावना ने लोगों को दोबारा ऐसी कोशिश करने से भी रोकना शुरू कर दिया है।

निस्कानेन सेंटर के इमिग्रेशन विशेषज्ञ गिल्बर्ट गुएरा के अनुसार, भारत जैसे देशों से अमेरिका तक गैर-कानूनी यात्रा में लाखों रुपये खर्च होते हैं। यदि पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो अधिकांश लोगों के लिए दोबारा प्रयास करना आर्थिक रूप से संभव नहीं होता। यही कारण है कि अब लोग ऐसे जोखिम उठाने से बच रहे हैं।

क्या डिपोर्टेशन का डर बना सबसे बड़ा कारण?

अमेरिकी सीमा सुरक्षा एजेंसी के ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि सख्त इमिग्रेशन नीति, लगातार बढ़ते डिपोर्टेशन और गैर-कानूनी यात्रा की ऊंची लागत ने भारतीयों के अमेरिका में अवैध प्रवेश के प्रयासों में उल्लेखनीय कमी ला दी है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आर्थिक परिस्थितियां, वीजा नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क पर बढ़ती कार्रवाई जैसे अन्य कारकों ने भी इस गिरावट में भूमिका निभाई है।

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