India at United Nations: संयुक्त राष्ट्र के 3 मंचों पर भारत का दमदार पक्ष, सतत विकास और ऊर्जा बदलाव पर दिया जोर

यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने SDGs, स्वच्छ ऊर्जा और बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर रखा भारत का दृष्टिकोण

India at United Nations: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विभिन्न उच्चस्तरीय मंचों पर भारत ने सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत को प्रमुखता से उठाया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अलग-अलग बैठकों में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान समावेशी, प्रभावी और दूरदर्शी नीतियों से ही संभव है।

सतत विकास लक्ष्यों के प्रति दोहराई प्रतिबद्धता

संयुक्त राष्ट्र में आयोजित हाई-लेवल पॉलिटिकल फोरम के दौरान “सभी के लिए टिकाऊ भविष्य” विषय पर हुई आम बहस में पी. हरीश ने वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए दुनिया को पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर परिवर्तनकारी कदम उठाने होंगे। उन्होंने बताया कि भारत अपनी विकास योजनाओं को वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ा रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर जोर

ऊर्जा बदलाव के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र की उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में वैश्विक बदलाव के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पारदर्शी, भरोसेमंद और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहा है तथा इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।

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संयुक्त राष्ट्र में सुधार की वकालत

पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की अनौपचारिक बैठक में ‘पैक्ट फॉर द फ्यूचर’ की समीक्षा से जुड़े मंत्रिस्तरीय राउंडटेबल में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक शासन संस्थाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक समावेशी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने पर जोर दिया, ताकि भविष्य की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सके।

वैश्विक मुद्दों पर भारत की सक्रिय भूमिका

भारत ने इन तीनों मंचों पर स्पष्ट किया कि वह जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक नीति सुधार जैसे अहम मुद्दों पर रचनात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का मानना है कि वैश्विक सहयोग और संस्थागत सुधारों के माध्यम से ही आने वाली चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है।

रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी

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