Luxury Life : ‘अपनी बेटी के लिए क्यों ठुकरा दी लग्जरी लाइफ’, गुरुग्राम की महिला फाउंडर ने बताई ये बड़ी वजह

Luxury Life : गुड़गांव की एक महिला फ़ाउंडर ने खुलासा किया कि उन्होंने और उनके पति ने लग्ज़री सोसायटियों के बजाय शांत और सादगीपूर्ण सोसायटी में घर चुना। उनका कहना है कि तुलना से दूर रहने से परिवार को अधिक खुशी और सुकून मिला।

Luxury Life : गुड़गांव में घर खरीदने या किराए पर लेने की दौड़ के बीच एक महिला फ़ाउंडर का अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। उद्यमी निष्ठा त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने और उनके पति ने शहर की कई प्रीमियम और लग्ज़री रिहायशी सोसायटियों को देखने के बावजूद वहां रहने का फैसला नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने एक शांत और साधारण सोसायटी को चुना, जहां उन्हें ज्यादा सुकून और अपनापन महसूस हुआ।

लग्ज़री टॉवर नहीं, शांत माहौल को दी प्राथमिकता

निष्ठा त्रिपाठी ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि घर की तलाश के दौरान उनका ब्रोकर लगातार गुड़गांव की आलीशान सोसायटियों की लिस्टिंग भेजता था। इन सोसायटियों में आधुनिक सुविधाएं, भव्य लॉबी और हाई-प्रोफाइल माहौल मौजूद था, लेकिन उन्होंने सभी विकल्पों को ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा कि ब्रोकर को उनका फैसला असामान्य लगा, लेकिन उनके लिए घर चुनने का आधार सिर्फ सुविधाएं नहीं बल्कि जीवनशैली और मानसिक शांति थी।

बेटी को तुलना की संस्कृति से दूर रखना चाहती थीं

निष्ठा ने बताया कि उनका सबसे बड़ा उद्देश्य अपनी बेटी को ऐसे माहौल में बड़ा करना था, जहां सामाजिक तुलना और दिखावे का दबाव कम हो। उनके अनुसार, बच्चों का बचपन ब्रांड्स और स्टेटस सिंबल के बजाय रिश्तों, अनुभवों और सीखने पर केंद्रित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी कम उम्र में ही दूसरों से तुलना करने की मानसिकता का हिस्सा बने। इसलिए उन्होंने ऐसी सोसायटी को चुना जहां समुदाय की भावना अधिक हो और दिखावे का दबाव कम हो।

किताबों की अलमारियां चुनीं, दिखावे से बनाई दूरी

निष्ठा ने बताया कि परिवार ने एक ऐसी सोसायटी में घर चुना जहां लंबे समय से रहने वाले निवासी हैं और लोगों के बीच अहंकार अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने महंगे और आकर्षक इंटीरियर के बजाय घर में किताबों की अलमारियां और सादगीपूर्ण माहौल को प्राथमिकता दी।

उनके मुताबिक, इस फैसले के बाद परिवार अधिक हल्का और संतुष्ट महसूस करता है। अब उनकी बातचीत जीवन के अनुभवों और यात्राओं पर होती है, न कि लगातार अपग्रेड और दिखावे की चीजों पर।

सोशल मीडिया की तुलना से जोड़ा मुद्दा

फ़ाउंडर ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि लग्ज़री जीवनशैली की लगातार तुलना लोगों पर उसी तरह का दबाव बनाती है जैसा सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियों को देखकर महसूस होता है। उनका मानना है कि तुलना के अवसर जितने कम होंगे, व्यक्ति अपने जीवन और उपलब्ध संसाधनों का उतना ही अधिक आनंद ले पाएगा।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

निष्ठा त्रिपाठी की पोस्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूज़र्स ने उनके विचारों की सराहना करते हुए सादगीपूर्ण जीवन को बेहतर बताया। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि घर का चुनाव उस जगह के आधार पर होना चाहिए जहां व्यक्ति को अपनापन और सामुदायिक जुड़ाव महसूस हो।

कुछ यूज़र्स ने गुड़गांव में घर ढूंढने की चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि शहर में अच्छी सुविधाओं और उचित किराए या कीमत के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।

क्यों चर्चा में है यह पोस्ट?

तेजी से बदलती शहरी जीवनशैली और बढ़ती उपभोक्तावादी संस्कृति के बीच निष्ठा त्रिपाठी की यह सोच लोगों को आकर्षित कर रही है। उनकी पोस्ट ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या लग्ज़री सुविधाएं वास्तव में खुशी का आधार हैं या फिर सादगी, समुदाय और मानसिक शांति अधिक महत्वपूर्ण हैं।

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