
Ashutosh Dixit: भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर 2026 को नया प्रमुख मिल गया। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने देश के 29वें चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (CAS) के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लिया, जो करीब 42 साल की सेवा के बाद इसी दिन सेवानिवृत्त हुए।
रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को आशुतोष दीक्षित की नियुक्ति की घोषणा की थी। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वह वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ के पद पर कार्यरत थे। लगभग चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल, प्रशिक्षण और रणनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
कब और कैसे शुरू हुआ आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर?
एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित का जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ था। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन प्राप्त किया। इसके बाद उनका सैन्य सफर अलग-अलग ऑपरेशनल और कमांड पदों से होते हुए वायुसेना के सर्वोच्च पद तक पहुंचा।
दीक्षित को 3,500 घंटे से अधिक विमान उड़ाने का अनुभव है। उनके पास लड़ाकू विमानों के संचालन के साथ-साथ परीक्षण और प्रशिक्षण से जुड़ा अनुभव भी है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं।
NDA और प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से ली शिक्षा
आशुतोष दीक्षित ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज के भी पूर्व छात्र हैं।
इन संस्थानों में प्रशिक्षण और अध्ययन के दौरान उन्हें सैन्य रणनीति, नेतृत्व, रक्षा योजना और सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी हासिल करने का अवसर मिला। उनके करियर में इन अनुभवों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
मिराज-2000 से तेजस तक कई विमान उड़ाए
आशुतोष दीक्षित ने अपने सैन्य करियर में भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख विमानों को उड़ाया है। इनमें मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमान, जगुआर, तेजस, किरण, हॉक और IL-78 शामिल हैं।
अलग-अलग तरह के विमानों को उड़ाने का अनुभव उन्हें लड़ाकू अभियानों, प्रशिक्षण और विमानन तकनीक की व्यापक समझ देता है। एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में उन्होंने विमान परीक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभाई हैं।
ऑपरेशन सफेद सागर, रक्षक और सिंदूर का अनुभव
आशुतोष दीक्षित के ऑपरेशनल अनुभव में ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर का नाम शामिल है। इन अभियानों से जुड़े अनुभव ने उनके सैन्य करियर को महत्वपूर्ण आयाम दिया।
ऑपरेशन सफेद सागर कारगिल संघर्ष के दौरान वायुसेना की भूमिका से जुड़ा था, जबकि ऑपरेशन रक्षक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के व्यापक संदर्भ में आता है। ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अनुभव के साथ अब वह वायुसेना की कमान संभाल रहे हैं।
वायुसेना प्रमुख बनने से पहले संभाले कई अहम पद
वायुसेना के शीर्ष पद पर पहुंचने से पहले आशुतोष दीक्षित ने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके प्रमुख पदों में शामिल हैं:
- वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ
- चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ
- एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सेंट्रल एयर कमांड
- डिप्टी चीफ ऑफ द एयर स्टाफ
- सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर
- एयर डिफेंस कमांडर
- साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में वरिष्ठ जिम्मेदारी
- सदर्न एयर कमांड में सेवा
इन पदों पर काम करते हुए उन्हें वायुसेना के संचालन, वायु रक्षा, कमान व्यवस्था और संयुक्त रक्षा योजना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं का अनुभव मिला।
सैन्य सेवाओं के लिए मिले कई सम्मान
आशुतोष दीक्षित को सैन्य सेवा के दौरान उनके योगदान के लिए कई सम्मान दिए गए हैं। उन्हें वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर और विभिन्न जिम्मेदारियों के दौरान दिए गए योगदान को दर्शाते हैं।
अमर प्रीत सिंह ने सौंपी वायुसेना की कमान
आशुतोष दीक्षित ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद वायुसेना प्रमुख का पद संभाला। कार्यभार सौंपने से पहले एपी सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद वायुसेना के जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर विदाई दी। करीब 42 वर्षों की सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने वायुसेना की जिम्मेदारी नए प्रमुख को सौंप दी।
नए एयर चीफ के सामने होंगी अहम जिम्मेदारियां
वायुसेना प्रमुख के रूप में आशुतोष दीक्षित के सामने भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारियों, आधुनिकीकरण और बदलती सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी जिम्मेदारियां होंगी। आधुनिक युद्ध में लड़ाकू विमानों के साथ ड्रोन, मिसाइल, निगरानी प्रणाली और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता का महत्व बढ़ रहा है।
ऐसे समय में वायुसेना की क्षमता को मजबूत करना, नई तकनीक को शामिल करना और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। उनके पिछले ऑपरेशनल और कमांड अनुभव के साथ अब उनके नेतृत्व में वायुसेना की आगे की प्राथमिकताओं पर नजर रहेगी।
written by Siddhi Stivastava



