
Gig Workers: Swiggy, Zomato, Uber और Ola जैसी कंपनियों के साथ काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की दिशा में कदम उठाया है। श्रम मंत्रालय ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग वर्कर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड का उद्देश्य ऐसे कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और उनकी जरूरतों के अनुरूप सरकार को सुझाव देना है।
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। बोर्ड सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को तैयार करने, उनकी निगरानी करने और उन्हें लागू करने के लिए सरकार को सिफारिशें देगा। इन योजनाओं के दायरे में भविष्य में PF, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल किए जाने पर विचार हो सकता है।
सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में कौन-कौन होगा शामिल?
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ श्रमिकों, कंपनियों और संबंधित संस्थानों को भी जगह दी जाएगी। इसमें प्रमुख कंपनियों के पांच प्रतिनिधि और कामगारों के पांच प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इसके अलावा कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), सिविल सोसाइटी और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। इस तरह बोर्ड में सरकार, नियोक्ताओं और श्रमिकों से जुड़े पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
साल में कम से कम तीन बार होगी बैठक
यह बोर्ड साल में कम से कम तीन बार बैठक करेगा। इन बैठकों में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए जरूरी सामाजिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा होगी। बोर्ड सरकार को यह सुझाव देगा कि किस तरह की कल्याणकारी योजनाएं बनाई जानी चाहिए, उनके लिए वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएं और उपलब्ध धन का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाए।
बोर्ड को असंगठित क्षेत्र के पारंपरिक श्रमिकों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए भी योजनाओं की सिफारिश करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य उन कामगारों तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाना है, जो नियमित नौकरी की पारंपरिक व्यवस्था से बाहर काम करते हैं।
PF और इंश्योरेंस की सुविधा अभी लागू नहीं
बोर्ड के गठन को गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन फिलहाल PF या बीमा की कोई नई योजना घोषित नहीं की गई है। बोर्ड पहले इन कामगारों की जरूरतों का आकलन करेगा और उसके आधार पर सरकार को योजनाओं की सिफारिश करेगा।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि Swiggy, Zomato, Uber और Ola के सभी कर्मचारियों या डिलीवरी पार्टनर्स को तत्काल PF और इंश्योरेंस मिलने लगेगा। इन सुविधाओं का लाभ किसे मिलेगा, इसके लिए पात्रता क्या होगी और योजनाएं कब लागू होंगी, यह सरकार के आगे के फैसलों पर निर्भर करेगा।
सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत हुआ बोर्ड का गठन
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस कानून का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को एक व्यापक कानूनी ढांचे में लाना है। इसके तहत पहले से लागू नौ सामाजिक सुरक्षा कानूनों को समाहित किया गया है।
इस व्यवस्था के जरिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कोड नवंबर 2025 में लागू हुआ था।
कौन होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?
गिग वर्कर्स ऐसे स्वतंत्र कामगार होते हैं, जो स्थायी नौकरी के बजाय अलग-अलग काम या प्रोजेक्ट के आधार पर कमाई करते हैं। उन्हें आमतौर पर काम के अनुसार भुगतान मिलता है। इनमें फ्रीलांसर, डिलीवरी पार्टनर और अन्य स्वतंत्र सेवा प्रदाता शामिल हो सकते हैं।
वहीं, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे लोग होते हैं, जो ऑनलाइन ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम हासिल करते हैं और सेवाएं देते हैं। उदाहरण के तौर पर:
- Swiggy और Zomato के डिलीवरी पार्टनर
- Uber और Ola के ड्राइवर
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाएं देने वाले अन्य कामगार
इनमें से कई कामगारों को नियमित नौकरी की तरह निश्चित वेतन, भविष्य निधि और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। इसी वजह से लंबे समय से उनके लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की मांग की जा रही थी।
आगे योजनाओं और उनके लाभ पर रहेगी नजर
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन के बाद अब गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए प्रस्तावित योजनाओं पर काम आगे बढ़ेगा। बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर सरकार यह तय कर सकती है कि इन कामगारों को किस तरह की सामाजिक सुरक्षा दी जाए और उसका वित्तीय प्रबंधन कैसे हो।
फिलहाल यह पहल योजनाएं तैयार करने और उनके लिए सुझाव देने की व्यवस्था है। PF, बीमा या दूसरी सुविधाओं का वास्तविक लाभ कब और किन कामगारों को मिलेगा, इसकी जानकारी सरकार की ओर से अलग से जारी होने वाली योजना और दिशा-निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगी।
written by Siddhi Srivastava



