
International Updates: भारत और रूस के बीच हुए नए रक्षा समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। भारत और रूस के बीच लागू हुए RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) समझौते के तहत अब दोनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत तैनात कर सकेंगे।
इस समझौते के मुताबिक, दोनों देशों को एक-दूसरे की जमीन पर अधिकतम 3000 सैनिक, 5 युद्धपोत और 10 सैन्य विमान तैनात करने की अनुमति होगी। शुरुआती तौर पर यह समझौता 5 वर्षों के लिए लागू रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
क्या है RELOS समझौता?
RELOS एक लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट है, जिसके तहत दोनों देश सैन्य संचालन के दौरान एक-दूसरे की सुविधाओं—जैसे ईंधन, मरम्मत, सप्लाई और बेस—का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे रक्षा सहयोग को मजबूत करने और आपसी तालमेल बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान में क्यों मची हलचल?
इस समझौते पर पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता देखने को मिल रही है। पाकिस्तानी विश्लेषक डॉ. अतिया अली काजमी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि रूस को भारत के साथ इस तरह के समझौते करते समय सतर्क रहना चाहिए।
अतिया काजमी के मुताबिक, भारत किसी एक गुट के साथ पूरी तरह खड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक संतुलित विदेश नीति अपनाता है—जहां वह अमेरिका, रूस और चीन—तीनों के साथ अपने हितों के अनुसार संबंध बनाए रखता है।
चीन फैक्टर और एशिया की रणनीति
काजमी ने यह भी कहा कि एशिया में भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति चीन बन सकता है और ऐसे में भारत पर ज्यादा दांव लगाना रूस के लिए जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने इसे “रणनीतिक हेजिंग” करार दिया, यानी एक ऐसा कदम जिसमें रूस अपने हितों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति हमेशा “मल्टी-अलाइनमेंट” पर आधारित रही है, जिसमें वह किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय सभी बड़े वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखता है।
भारत-रूस संबंधों का नया अध्याय
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंध रहे हैं। रूस लंबे समय से भारत को सैन्य उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराता रहा है। ऐसे में RELOS समझौता इन संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इस समझौते से दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी और आपातकालीन या रणनीतिक परिस्थितियों में सहयोग आसान होगा। RELOS समझौता केवल एक रक्षा डील नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी का संकेत है। जहां एक ओर यह दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देशों—खासकर पाकिस्तान—की चिंता भी बढ़ा रहा है।
Written By: Anushri Yadav



