Election Commission Controversy: 30 लाख वोटरों के नाम हटाने की साजिश? अभिषेक बनर्जी ने शेयर किए WhatsApp स्क्रीनशॉट, CEC और CJI से मांगा जवाब

SIR विवाद के बीच अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के कथित WhatsApp स्क्रीनशॉट साझा कर 30 लाख वोटरों के नाम हटाने का आरोप लगाया, चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट भी चर्चा में

Election Commission Controversy: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग के एक WhatsApp ग्रुप के कथित स्क्रीनशॉट साझा करते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूची से करीब 30 लाख नाम हटाने की साजिश से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। उन्होंने इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत से जवाब मांगा है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों में उठाए गए मतभेदों की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी।

अभिषेक बनर्जी ने क्या आरोप लगाए?

अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि ये अप्रैल में एक ऑब्जर्वर WhatsApp ग्रुप में हुई बातचीत से जुड़े हैं। उनके मुताबिक, इन स्क्रीनशॉट से वोटर लिस्ट से करीब 30 लाख नाम हटाने की कथित योजना को लेकर सवाल उठते हैं।

बनर्जी ने कहा कि इन सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें दबाया जा सकता है। उन्होंने सीधे CEC ज्ञानेश कुमार और CJI सूर्यकांत का नाम लेते हुए कहा कि देश के सामने उठे इन सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी इस पोस्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

हालांकि, WhatsApp स्क्रीनशॉट में दिखाई देने वाली सामग्री से जुड़े अभिषेक बनर्जी के आरोपों को स्वतंत्र रूप से साबित तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि उनके द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में देखना जरूरी है।

चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति का दावा

विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने, SIR और चुनावी रोल से जुड़े IT सिस्टम सहित कई मुद्दों पर थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में फैसलों को बिना पर्याप्त जानकारी या उनकी मंजूरी के लिए जाने पर सवाल उठाए। इनमें Form 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।

हालांकि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन दावों पर अलग रुख रखा है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के अधिकारियों ने कहा कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और आयोग के निर्णयों में किसी तरह की असहमति को लेकर पेश की गई तस्वीर सही नहीं है।

Form 6 में बदलाव को लेकर भी विवाद

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर भी विवाद सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस फॉर्म में SIR से संबंधित एक नया सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। बाद में संधू ने इसे कथित तौर पर “unauthorised and illegal” बताते हुए हटाने की बात कही थी।

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इसी मुद्दे को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी रोल से जुड़े IT सिस्टम में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका को कमजोर किया गया और Form 6 में जरूरी प्रक्रिया के बिना बदलाव किया गया। ये सभी आरोप राजनीतिक नेताओं द्वारा लगाए गए हैं और इन पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष अलग है।

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर क्या हुआ?

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और फिर अपील की प्रक्रिया को लेकर भी विवाद हुआ है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIR के दौरान 27.16 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने दोबारा नाम शामिल कराने के लिए अपील की है। कुल मिलाकर 38.31 लाख अपीलें दायर की गई थीं, जिनमें कुछ नाम जोड़ने और कुछ अन्य नाम हटाने से संबंधित थीं।

यही प्रक्रिया अब राजनीतिक विवाद का बड़ा केंद्र बनी हुई है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और सत्यापन के आधार पर की जा रही है।

महुआ मोइत्रा ने भी CEC के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

अभिषेक बनर्जी के आरोपों से पहले TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी रोल और उससे जुड़े सॉफ्टवेयर के संचालन में स्थानीय अधिकारियों को पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए।

महुआ ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति का हवाला देते हुए CEC की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की।

वहीं, चुनाव आयोग की ओर से सामने आए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि आयोग के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं। ऐसे में फिलहाल विवाद का एक प्रमुख पहलू यही है कि सामने आई आंतरिक आपत्तियों और आयोग के आधिकारिक रुख के बीच स्थिति को किस तरह समझा जाए।

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अब WhatsApp स्क्रीनशॉट ने बढ़ाई सियासी हलचल

अभिषेक बनर्जी की ओर से WhatsApp स्क्रीनशॉट साझा किए जाने के बाद SIR को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। उनका दावा है कि स्क्रीनशॉट वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से आंतरिक मतभेदों को लेकर सामने आया स्पष्टीकरण अलग तस्वीर पेश करता है।

ऐसे में 30 लाख नाम हटाने के अभिषेक बनर्जी के दावे, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और SIR से जुड़े मामलों पर आगे होने वाली संस्थागत तथा न्यायिक कार्रवाई इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण होगी।

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