
International News: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि उसके फैसलों की गंभीर कीमत चुकानी पड़ सकती है। दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखने के संकेत दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं।
जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले एक व्यावसायिक कंटेनर जहाज पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इस सप्ताह तीसरे दौर की सैन्य कार्रवाई शुरू की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि यह अभियान समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और जहाज पर हुए हमले के जवाब में चलाया गया। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए व्यापक सैन्य कार्रवाई की।
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान ने गलत फैसला लिया है और अब उसे उसके परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे और ऐसे कदमों का जवाब दिया जाएगा।
उधर ईरान ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने पहले हुए समझौतों और आपसी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया, जिसके कारण मौजूदा हालात पैदा हुए हैं। ईरान का दावा है कि उसने पहले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की सहमति दी थी, लेकिन अमेरिका की सैन्य गतिविधियों ने पूरे समझौते को प्रभावित किया।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिकी हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उसके खिलाफ आगे कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका तत्काल और सख्त जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर ईरान ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) समेत खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों और समुद्री जहाजों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचती है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेज उछाल, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगा रहे हैं और सैन्य गतिविधियां भी तेज हो चुकी हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते तनाव को रोक पाएंगे या फिर यह टकराव पूरे क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष की ओर धकेल देगा।



