भांडुप रैली में उद्धव ठाकरे का भाजपा और बागी नेताओं पर बड़ा हमला, बोले- गद्दारों को टिकट देना मेरी गलती थी

मुंबई के भांडुप में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की रैली में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा और पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। अपने भाषण में उन्होंने न केवल बागी सांसदों को निशाने पर लिया, बल्कि भाजपा पर भी शिवसेना को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। रैली में जुटी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि शिवसेना के संघर्ष और आत्मसम्मान की लड़ाई का प्रतीक है।

रैली की शुरुआत में ही उद्धव ठाकरे ने अपने समर्थकों को “जलती हुई मशालें” बताते हुए कहा कि यही ऊर्जा उन्हें आगे की लड़ाई लड़ने का हौसला देती है। उन्होंने कहा कि तमाम राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) अपने सिद्धांतों और विचारधारा के साथ खड़ी है।

अपने संबोधन के दौरान उद्धव ठाकरे ने उन नेताओं को लेकर आत्ममंथन भी किया जो चुनाव जीतने के बाद पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले गए। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे लोगों को टिकट देना उनकी गलती थी। ठाकरे ने कहा कि जनता ने उन उम्मीदवारों को उनके चेहरे से ज्यादा शिवसेना और मशाल चुनाव चिह्न पर भरोसा करके चुना था। ऐसे में अगर वे बाद में जनता के विश्वास के साथ खड़े नहीं रहे, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी भी उनकी बनती है। इसी कारण उन्होंने जनता से माफी भी मांगी।

भाजपा पर हमला बोलते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना को खत्म करने की कोशिशें नई नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से भाजपा ने पार्टी को कमजोर करने का प्रयास किया है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के साथ लंबे राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद कांग्रेस ने कभी शिवसेना को तोड़ने की कोशिश नहीं की, जबकि भाजपा लगातार पार्टी के नेताओं और जनाधार को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम करती रही।

ठाकरे ने भाजपा के शुरुआती राजनीतिक दौर का जिक्र करते हुए कहा कि जब पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में बेहद कमजोर स्थिति में थी, तब शिवसेना ने उसका साथ दिया था। उन्होंने कहा कि आज वही पार्टी शिवसेना को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति और शिवसेना का नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला राज्य की जनता करेगी, कोई बाहरी व्यक्ति नहीं। बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि कुछ नेता सिर्फ अपनी कुर्सी और सत्ता की ताकत के कारण प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन सत्ता खत्म होने के बाद उनकी वास्तविक पहचान सामने आ जाती है।

बागी सांसदों पर हमला करते हुए ठाकरे ने उन्हें “गद्दार” करार दिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग पार्टी की बदौलत सांसद बने, वे आज उसी पार्टी के खिलाफ खड़े हैं। ठाकरे ने कहा कि वफादारी बिकाऊ नहीं होती और जो लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए विचारधारा बदल लेते हैं, वे जनता के भरोसे के साथ न्याय नहीं कर सकते।

किसानों के मुद्दे को भी उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उनकी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी का वादा पूरा किया था। साथ ही उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी सीट को सहयोगी दल के लिए छोड़ा जाना है, तो उसकी घोषणा अभी से कर दी जानी चाहिए।

भांडुप की यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसे आगामी चुनावी रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे के भाषण से साफ संकेत मिला कि वह भाजपा और बागी नेताओं के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए रखने वाले हैं। वहीं उनके बयान आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति को और अधिक गर्माने का काम कर सकते हैं।

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