
Udhayanidhi Stalin Arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि ने TVK सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे वह कोई “आतंकवादी” हों। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें डराने और राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए पूरे प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया।
त्रिची एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में उदयनिधि ने कहा कि सरकार ने उन्हें पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिया, लेकिन इसके लिए 3,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने कहा कि चेन्नई से तंजावुर तक उन्हें ऐसे ले जाया गया जैसे कोई बड़ा अपराधी या आतंकवादी हो। उन्होंने साफ कहा कि वह इस पूरे मामले का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे।
उदयनिधि ने अपने विवादित भाषण का भी बचाव किया। उनका कहना था कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं ने पूरा भाषण सुने बिना ही उनकी आलोचना शुरू कर दी। उनके मुताबिक सरकार असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह कार्रवाई कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी बेटे का बचाव किया। उन्होंने कहा कि उदयनिधि ने अपने भाषण में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया और न ही कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की। स्टालिन ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता की गिरफ्तारी सरकार के अहंकार का प्रतीक है और इसका मकसद कावेरी जल विवाद समेत सरकार की नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाना है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्होंने पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक भी की।
दिलचस्प बात यह रही कि डीएमके के राजनीतिक विरोधियों ने भी गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाए। एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि उदयनिधि को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए था, लेकिन विधानसभा के बजट सत्र से पहले इस तरह गिरफ्तारी करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की गैर-मौजूदगी में सदन चलाना चाहती है।
डीएमडीके महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने इस कार्रवाई की तुलना औपनिवेशिक दौर के “गैगिंग एक्ट” से की और कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। वहीं पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने भी पुलिस कार्रवाई को अनावश्यक और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि जब हाई कोर्ट ने तत्काल गिरफ्तारी से बचने की सलाह दी थी, तब इतनी जल्दबाजी समझ से परे है।
वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि बजट सत्र से ठीक पहले विपक्ष के नेता को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने पूछा कि अदालत के निर्देशों के बावजूद पुलिस ने इतनी जल्द कार्रवाई क्यों की।
उदयनिधि ने दावा किया कि तंजावुर में किसानों के बीच दिए गए उनके भाषण को जनता का अच्छा समर्थन मिला था और इसी वजह से सरकार ने उन पर झूठा मामला दर्ज कर राजनीतिक विवाद खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने दोहराया कि वह अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और किसी भी तरह की राजनीतिक कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं।



