
Crime News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। थाना आसपुर देवसरा पुलिस और जनपद की स्पेशल टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 202.31 ग्राम अवैध एमडी (मेथामफेटामाइन) ड्रग्स बरामद की है। बरामद नशीले पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने इस मामले में पांच शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है, जबकि तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक अर्टिगा कार और बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है।
पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर के निर्देशन में जनपद भर में अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) आलोक कुमार और क्षेत्राधिकारी पट्टी मनोज कुमार सिंह रघुवंशी के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी आसपुर देवसरा राकेश चौरसिया और स्पेशल टीम प्रभारी विजेंद्र सिंह ने संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया।
चेकिंग के दौरान पकड़े गए आरोपी
पुलिस के अनुसार 7 और 8 जून की मध्यरात्रि सैफाबाद-मुरैनी मार्ग पर संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक अर्टिगा कार (UP50 BP 7575) और एक बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान आरोपियों और वाहनों से कुल 202.31 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद हुई।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरज दुबे उर्फ दीपेश, आनंद मिश्रा, दिव्यांशु दुबे उर्फ गब्बर, आलोक शुक्ला और मंजीत मिश्रा के रूप में हुई है। इनमें दो आरोपी जौनपुर और तीन प्रतापगढ़ जिले के निवासी हैं।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एमडी ड्रग्स की सप्लाई और बिक्री के लिए जा रहे थे। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी आनंद मिश्रा और मंजीत मिश्रा अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लंबे समय से नशे के कारोबार में सक्रिय थे।
पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार इस नेटवर्क में कुशु मिश्रा और छोटू मिश्रा नाम के अन्य लोगों की भी भूमिका सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनके परिवार के एक सदस्य पर पहले भी हरियाणा और दिल्ली पुलिस द्वारा एमडी ड्रग्स तस्करी के मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है।
कई आरोपियों का रहा है आपराधिक इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से कई के खिलाफ पहले से हत्या के प्रयास, लूट, आर्म्स एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, धोखाधड़ी, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इससे साफ है कि गिरफ्तार आरोपी पहले से ही अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक खेप की बरामदगी नहीं बल्कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में फैले नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसकी सप्लाई किन जिलों एवं राज्यों में की जानी थी।
एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
इस मामले में थाना आसपुर देवसरा में मुकदमा संख्या 147/2026 के तहत धारा 22(सी) एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। बरामद ड्रग्स की मात्रा वाणिज्यिक श्रेणी (Commercial Quantity) में आने के कारण आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने जनता से की अपील
पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने कहा कि नशे का कारोबार समाज और युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कहीं भी नशा तस्करी या मादक पदार्थों की बिक्री की सूचना मिले तो तत्काल पुलिस को अवगत कराएं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और जल्द ही इस मामले में अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
रिपोर्ट: उमेश पाण्डेय, जिला संवाददाता, यूनाइटेड भारत



