
Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 13 सांसदों और नेताओं के एक समूह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में अंदरूनी असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं तेज हैं।
जानकारी के अनुसार, राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस घटनाक्रम ने बंगाल की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।
अलग गुट बनाने की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग गुट के रूप में सीट आवंटित करने की मांग कर सकते हैं। इससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर संभावित राजनीतिक पुनर्संरचना की अटकलें और तेज हो गई हैं।
मुलाकात में जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें अरूप चक्रवर्ती, बापी हलदार, जगदीश बसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, पार्थ भौमिक, असित मल, मिताली बाग, शताब्दी रॉय और प्रतिमा मंडल शामिल हैं। सुखेंदु शेखर राय को छोड़कर बाकी सभी लोकसभा सांसद बताए जा रहे हैं।
NDA को समर्थन देने का दावा
काकोली घोष दस्तीदार ने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में दावा किया कि उनके सहित करीब 20 TMC सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यदि तृणमूल कांग्रेस में औपचारिक विभाजन होता है, तो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून से बचने के लिए बागी सांसदों को लोकसभा में पार्टी के कुल सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होगी।
सुखेंदु शेखर राय ने छोड़ी TMC
इससे पहले सोमवार को ही राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने अपने पद से इस्तीफा देने के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस छोड़ने का भी ऐलान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के मुद्दों पर घिरी हुई है।
राय ने यह भी कहा कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़े चर्चित रेप और मर्डर मामले में कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की आंतरिक जांच की मांग करने के बाद उन्हें पार्टी के भीतर लगातार अलग-थलग किया जाने लगा था।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में सबूत मिटाने में कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग करना ही उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्हें महसूस हो गया था कि पार्टी में उनका भविष्य लंबा नहीं है।
बंगाल की राजनीति पर नजर
TMC सांसदों की यह बैठक और NDA को समर्थन देने के दावे आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व और संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।



