
Cyber Crime News: देशभर में टेलीग्राम के माध्यम से संचालित किए जा रहे कथित “मेगा डील” और “लूट ऑफर” चैनलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स में महंगे स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और ब्रांडेड उत्पाद 70 प्रतिशत से 99 प्रतिशत तक की छूट पर उपलब्ध दिखाए जा रहे हैं। कई मामलों में उपभोक्ताओं से एडवांस भुगतान लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिसके बाद इन चैनलों की गतिविधियों की जांच और कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स में कई टेलीग्राम चैनल ऐसे ऑफरों का प्रचार करते दिखाई दे रहे हैं। इनमें MEGA DEAL’s, Ecomloots, Shopping Lootly, Offers Sale Live, Mega Deals IND, Star Deals, Shopping Deals और Shopping for Family जैसे चैनलों के नाम शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर नियमित रूप से ऐसे उत्पादों के ऑफर साझा किए जा रहे हैं, जिनकी वास्तविक बाजार कीमत हजारों या लाखों रुपये होती है, जबकि उन्हें कुछ सौ या हजार रुपये में उपलब्ध बताने का दावा किया जाता है।
वायरल स्क्रीनशॉट्स में Apple iPhone 16 Pro Max, iPhone 17 Pro Max और अन्य प्रीमियम स्मार्टफोन मॉडल 99 प्रतिशत तक की छूट के साथ मात्र ₹879, ₹949 और ₹999 में उपलब्ध दिखाए गए हैं। साइबर और ई-कॉमर्स क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि किसी भी वैध व्यावसायिक मॉडल में इतने बड़े डिस्काउंट पर बिक्री लगभग असंभव है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऑफर उपभोक्ताओं को आकर्षित करने और उन्हें जल्दबाजी में भुगतान करने के लिए प्रेरित करने का माध्यम बन सकते हैं।
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कैसे काम करता है यह मॉडल?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में आमतौर पर कुछ समान तरीके अपनाए जाते हैं। पहले उपभोक्ताओं को अविश्वसनीय डिस्काउंट दिखाए जाते हैं। इसके बाद ऑफर को सीमित समय के लिए बताकर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में एडवांस भुगतान की मांग की जाती है या एफिलिएट एवं विशेष लिंक के माध्यम से खरीदारी करने के लिए कहा जाता है। शिकायतों के अनुसार कुछ मामलों में भुगतान के बाद उत्पाद नहीं भेजे जाते या ऑर्डर किए गए सामान से अलग उत्पाद भेज दिया जाता है। वहीं शिकायत बढ़ने पर संबंधित चैनल, मोबाइल नंबर या अकाउंट बदल दिए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ब्रांड या कंपनी के नाम का उपयोग करके उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण कानूनों और साइबर अपराध से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच का विषय हो सकता है। बड़ी संख्या में लोगों को जोड़कर संचालित किए जा रहे ऐसे चैनलों की गतिविधियों की निगरानी आवश्यक है।
मामले को लेकर मांग की जा रही है कि साइबर क्राइम सेल इन चैनलों की गतिविधियों की जांच करे। एडवांस भुगतान लेने वाले बैंक खातों और यूपीआई आईडी का सत्यापन किया जाए। साथ ही भ्रामक और अवास्तविक डिस्काउंट के दावों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि कहीं उपभोक्ताओं को धोखा तो नहीं दिया जा रहा। यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अलावा उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी आवश्यकता बताई जा रही है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि कोई व्यक्ति ₹1 लाख या उससे अधिक कीमत वाला स्मार्टफोन ₹999 या ₹1500 में देने का दावा कर रहा है और साथ ही पहले भुगतान करने के लिए कह रहा है, तो उपभोक्ताओं को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले उसकी सत्यता आधिकारिक वेबसाइट, अधिकृत विक्रेता और सुरक्षित भुगतान व्यवस्था के माध्यम से अवश्य जांच लेनी चाहिए।
जनहित में यह आवश्यक है कि ऐसे सभी संदिग्ध ऑनलाइन ऑफरों और टेलीग्राम चैनलों की निष्पक्ष जांच हो ताकि उपभोक्ताओं की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भरोसा कायम रखा जा सके।
– शाश्वत तिवारी



