Kolkata/Panihati: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसी कहानी उभरकर सामने आई है, जिसने चुनावी मुद्दों को पूरी तरह बदल दिया है। उत्तरी 24 परगना जिले की पानीहाटी विधानसभा सीट, जो कभी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का मजबूत गढ़ मानी जाती थी, अब भावनाओं और न्याय की मांग का केंद्र बन चुकी है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े चर्चित रेप और हत्या मामले ने न सिर्फ राज्य की राजनीति को झकझोर दिया, बल्कि अब इसका सीधा असर चुनावी मैदान में भी देखने को मिल रहा है। इस सीट पर बीजेपी ने पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को बेहद संवेदनशील और दिलचस्प बना दिया है।
पानीहाटी में सहानुभूति की लहर
पानीहाटी में इन दिनों एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। यहां चुनावी चर्चा किसी पार्टी, नेता या विकास के मुद्दों पर कम और “न्याय” पर ज्यादा केंद्रित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर पीड़िता के परिवार के साथ खड़े हैं।
एक स्थानीय दुकानदार अविजित घोष के मुताबिक,
“हमें किसी पार्टी से फर्क नहीं पड़ता, हम सिर्फ न्याय चाहते हैं। पीड़िता की मां का संघर्ष ही हमारे लिए सबसे बड़ा मुद्दा है।”
महिलाओं का खास समर्थन
रत्ना देबनाथ को खास तौर पर महिलाओं का भारी समर्थन मिलता नजर आ रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान जब वह घर-घर पहुंचती हैं, तो कई महिलाएं भावुक होकर उन्हें गले लगा लेती हैं।
यह साफ संकेत है कि यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी बन चुका है। महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी इस बार प्रमुख चुनावी एजेंडा बन गया है।
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त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति
पानीहाटी सीट पर इस बार मुकाबला सीधा नहीं बल्कि त्रिकोणीय हो गया है।
- बीजेपी ने रत्ना देबनाथ को मैदान में उतारा है
- टीएमसी ने पूर्व विधायक निर्मल घोष के बेटे पर भरोसा जताया है
- वहीं सीपीएम ने युवा नेता कलातन दासगुप्ता को उम्मीदवार बनाया है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी का संगठन भले मजबूत हो, लेकिन जनता की भावनाएं इस बार समीकरण बदल सकती हैं।
निर्मल घोष पर विवाद का असर
टीएमसी के पूर्व विधायक निर्मल घोष पहले ही विवादों में रहे हैं। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने पीड़िता के शव के अंतिम संस्कार को जल्दबाजी में करवाया, जिससे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।
इस मुद्दे ने विपक्ष को टीएमसी पर हमला करने का बड़ा मौका दिया और जनता के बीच भी नाराजगी बढ़ाई।
क्या बदल जाएगा सियासी समीकरण?
पानीहाटी सीट कभी हाई-प्रोफाइल नहीं रही, लेकिन इस बार यह पूरे राज्य की नजरों में है। यहां चुनाव अब सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि न्याय और संवेदनाओं का प्रतीक बन गया है।
आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि क्या जनता की भावनाएं राजनीतिक समीकरणों पर भारी पड़ती हैं या फिर संगठन और रणनीति बाजी मार लेती है।
Written By: Anushri Yadav



