Dowry Law India: सोचिए… अगर कोई महिला खुद कहे कि उसने दहेज दिया था… तो क्या उसका ही परिवार आरोपी बन जाएगा? यही बड़ा सवाल अब देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने था। और अब Supreme Court of India ने इस पर ऐसा फैसला सुनाया है, जो लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आया है।
Supreme Court of India ने दहेज से जुड़े मामलों में अहम स्पष्टता देते हुए कहा है कि यदि कोई महिला अपनी शिकायत में दहेज देने की बात स्वीकार करती है, तो केवल इसी आधार पर उसके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता। Supreme Court of India की जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने एक पति द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपनी पत्नी और उसके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि कई मामलों में महिलाएं सामाजिक दबाव, परंपराओं और परिस्थितियों के चलते दहेज देने को मजबूर होती हैं, इसलिए उन्हें या उनके परिवार को आरोपी बनाना न्यायसंगत नहीं होगा।
🔹 पति की मांग खारिज, कानून का उद्देश्य बताया
मामले में पति ने अपील करते हुए मांग की थी कि पत्नी के बयान के आधार पर उसके परिवार पर भी दहेज देने का केस चलाया जाए। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दहेज निषेध कानून का उद्देश्य पीड़ित को सजा देना नहीं, बल्कि उसे न्याय दिलाना है। साथ ही, कोर्ट ने धारा 7(3) का हवाला देते हुए बताया कि यह प्रावधान पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करता है, ताकि वे बिना किसी भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
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🔹 ठोस सबूत होने पर ही संभव कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दहेज देने के स्वतंत्र और ठोस सबूत सामने आते हैं—जो केवल शिकायत या बयान से अलग हों—तभी संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल पीड़ितों को राहत मिलेगी, बल्कि दहेज प्रथा के खिलाफ लड़ाई को भी मजबूती मिलेगी और लोग बिना डर के न्याय की मांग कर सकेंगे।
Written By: Kalpana Pandey