Prayagraj News-दर्शकों की तालियांं ही हमारा मोटिवेशन

Prayagraj News-आज के दौर में हर कोई फिल्मों में काम करना चाहता है। इसके लिए उसे रंगमंच की कठिन परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है। इस परीक्षा के दौरान कलाकारों को किन किन रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है,दौरान किन किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उन्हें मोटिवेशन कहा से आता है और ओटिटि के आने से कलाकारों को कितना लाभ हुआ। इस पर रंगमंच की दुनिया से पच्चीस वर्षों से जुड़े कलाकार हरविंदर सिंह ने कहा कि दर्शकों की तालियां ही हमारा मोटिवेशन है। यह बातें उन्होंने युनाइटेड भारत के संवाददाता आकाश त्रिपाठी को दिये साक्षात्कार में बताई।
एक कलाकार को किन किन समस्याओं हो कर गुजरना पड़ता है़?
इस पर उन्होंने बताया कि रंगमंच के कलाकारों के पास में आय का कोई बड़ा स्रोत नहीं होता है, जिस वजह से कलाकारों को कई कई दिनों तक बिना पैसे के काम करना पड़ता है। पैसे न होने के चलते कलाकारों को अपनी जीविका चलाने में समस्या होने लगती है। जिस वजह से कलाकार की हिम्मत टूटने लगती है, और वो धीरे धीरे हताश होने लगता है। इस वक्त एक कलाकार को उसके काम के प्रति उसका समर्पण और दृढ़ निश्चय ही उसे वापस से रंगमंच करने के लिए प्रेरित करता है।
ओटिटि और फिल्म में क्या अंतर है?
इस पर हल्के हंसते हुए कहा कि दोनों में बहुत अंतर है। ओटिटि में कलाकार और दर्शक दोनों अपनी पसंद और रूचि के हिसाब से चलचित्र को देख सकते है। इसमे क्षेत्रीय कलाकारों को अपनी कला को दिखाने का मौका मिलता है। वहीं अब अगर फिल्म की बात करें, तो इसमे दर्शक को उन दृश्यों को देखने के लिए बाध्य होना पड़ता है। वो केवल और केवल वहीं दृश्य देख सकते है जो उन्हें उस फिल्म का निर्देश दिखाना चाहता है।
ओटिटि के आने से कलाकारों को कितना लाभ हुआ?
ओटिटि ने कलाकारों के लिए आय के अच्छे स्रोत के साथ साथ अपनी कला को प्रदर्शन करने का भी अच्छा मंच है। ओटिटि की खासीयत होती है कि इसमे कलाकारों को अच्छी आय तो ही है इसके साथ ही अपनी कला का प्रदर्शन करने का पूरा मौका मिलता है। रिपोर्टर ने तुरंत पूछा ऐसा क्यों होता है? इस पर उन्होंने अपने कंधे को लाइट की ओर घुमाते हुए बताया कि ओटिटि में कलाकार के पात्र को शुरू से अंत तक कई एपिसोड्स में दिखाया जाता है, जबकि फिल्मों में कलाकार का पात्र कब आया और कब चला गया कुछ पता नहीं चलता। ओटिटि में एपिसोड्स ज्यादा होने से कलाकारों को आय लंबे समय तक होती है। इसी के साथ उन्होंने अभिनय की विधा वरटीकल सीनेमा के बारे में बताया।
वरटीकल सीनेमा क्या है?
हरविंदर सिंह बताते है वरटीकल सीनेमा आज अभिनय की दुनिया की वो नई विधा है, जिसने कलाकारों के लिए आय के नवीन स्रोत का सृजन किया है। इसमे एक से दो मिनट का वीडियो शूट किया जाता है और इसके लिए कलाकारों को दस से पंद्रह हजार रूपए तक मिल जाते है। यह मुंबई, दिल्ली और कलकत्ता जैसे महानगरों में तेजी से प्रचलित हो रहा है।

Prayagraj News-Read Also-Smriti Irani News-स्मृति ईरानी ने सपा प्रमुख को गोरखपुर से चुनाव लड़कर जीतने की दी चुनौती

Show More

Related Articles

Back to top button