
National News: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित एपस्टीन फाइल्स मामले में नाम सामने आने के बाद विवादों में घिरे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को शुरुआती जांच में राहत मिली है। सूत्रों के अनुसार अब तक की जांच में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की अवैध या आपत्तिजनक गतिविधि का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है।
मामला कैसे बना चर्चा का विषय?
एपस्टीन फाइल्स से जुड़े दस्तावेजों में दुनिया भर की कई प्रमुख हस्तियों के नाम सामने आए थे। इन्हीं चर्चाओं के बीच हरदीप सिंह पुरी का नाम भी सुर्खियों में आया। इसके बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और विपक्षी दलों ने मामले में पारदर्शिता की मांग की।
हालांकि, प्रारंभिक जांच में ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली है जो मंत्री को किसी गैरकानूनी गतिविधि से सीधे तौर पर जोड़ती हो। सूत्रों का कहना है कि दस्तावेजों में नाम आने का अर्थ यह नहीं कि संबंधित व्यक्ति किसी अपराध में शामिल है—हर पहलू की तथ्यात्मक जांच जरूरी होती है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
नाम सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि जांच एजेंसियां पूरी स्वतंत्रता के साथ काम कर रही हैं और बिना प्रमाण किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
शुरुआती क्लीन चिट की खबर के बाद राजनीतिक माहौल कुछ शांत जरूर हुआ है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट आने तक स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।
जांच अभी जारी
जांच एजेंसियां संबंधित दस्तावेजों, संपर्कों और तथ्यों की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम निष्कर्ष व्यापक विश्लेषण के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, शुरुआती जांच में राहत मिलना हरदीप सिंह पुरी के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है और इसका असर देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
एपस्टीन फाइल्स विवाद में केंद्रीय मंत्री को मिली शुरुआती राहत ने सियासी हलचल को कुछ हद तक थाम दिया है। हालांकि, जांच पूरी होने तक यह मामला चर्चा में बना रह सकता है। अब सभी की नजर अंतिम रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।



