National News: किस इजरायली ड्रोन से सतर्क है पाकिस्तान? पीएम मोदी के दौरे से खुल सकती है 83,000 करोड़ की रक्षा डील की राह

भारत-इजरायल के बीच Harop, Heron TP और Hermes 900 ड्रोन के साथ मिसाइल रक्षा तकनीक ट्रांसफर पर हो सकती है बड़ी प्रगति

National News:  प्रधानमंत्री Narendra Modi के संभावित इजरायल दौरे को लेकर रक्षा गलियारों में हलचल तेज है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच करीब 83,000 करोड़ रुपये के बड़े रक्षा सौदे पर महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। यह डील ड्रोन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और अत्याधुनिक हथियार तकनीक से जुड़ी बताई जा रही है।

कौन से ड्रोन पर टिकी है सबकी नजर?

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इजरायल के कुछ खास ड्रोन सिस्टम ऐसे हैं जिनकी क्षमताओं ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ाई है।

  • Israel Aerospace Industries द्वारा विकसित Harop को “लॉइटरिंग म्यूनिशन” यानी आत्मघाती ड्रोन कहा जाता है। यह लंबे समय तक हवा में मंडराकर दुश्मन के रडार या ठिकाने की पहचान कर सीधे टकराकर उसे नष्ट कर सकता है।

  • Heron TP एक लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला हाई-एंड ड्रोन है, जो निगरानी के साथ-साथ सटीक हमला करने में सक्षम है।

  • Hermes 900 को सीमा निगरानी और रीयल-टाइम इंटेलिजेंस के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है।

इन ड्रोन की खासियत है उनकी लंबी उड़ान क्षमता, सटीक टारगेटिंग और रडार से बच निकलने की तकनीक।

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मिसाइल रक्षा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भी चर्चा

संभावित डील में इजरायल की मशहूर मिसाइल रक्षा प्रणाली Iron Dome की तकनीक पर भी बातचीत हो सकती है। यह सिस्टम कम दूरी की रॉकेट और मिसाइल हमलों को हवा में ही निष्क्रिय करने के लिए जाना जाता है। अगर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का रास्ता खुलता है, तो भारत अपनी घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को और मजबूत कर सकेगा।

रणनीतिक संदेश और क्षेत्रीय असर

भारत-इजरायल रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है, लेकिन इस संभावित मेगा डील से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और गहरी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय सेना की निगरानी, सटीक हमले और हवाई रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

दक्षिण एशिया के सुरक्षा समीकरणों में भी इसका असर दिख सकता है। खासकर पाकिस्तान, जो पहले से ही भारत के बढ़ते रक्षा आधुनिकीकरण पर नजर रखे हुए है, इस डील को क्षेत्रीय संतुलन के संदर्भ में देख रहा है।

हालांकि, अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि दौरे और वार्ताओं के बाद ही होगी। लेकिन इतना तय है कि यह संभावित रक्षा समझौता भारत की सैन्य ताकत को नई दिशा दे सकता है।

Written By: Anushri Yadav

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