
UNSC Debate: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आयोजित ‘महिलाएं, शांति और सुरक्षा’ विषयक उच्च स्तरीय खुली बहस में भारत ने महिला सशक्तिकरण और शांति निर्माण में उनकी भूमिका को लेकर मजबूत पक्ष रखा। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की भागीदारी के बिना कोई भी शांति प्रक्रिया पूर्ण और टिकाऊ नहीं हो सकती।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने बहस को संबोधित करते हुए कहा कि सशस्त्र संघर्षों का सबसे अधिक और असमान प्रभाव महिलाओं पर पड़ता है। युद्ध और हिंसा की स्थितियों में महिलाएं न केवल विस्थापन और आजीविका संकट का सामना करती हैं, बल्कि कई बार यौन हिंसा जैसी गंभीर चुनौतियों का भी शिकार बनती हैं।
महिलाओं की भागीदारी शांति की अनिवार्य शर्त
राजदूत पी. हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 की मूल भावना यही है कि शांति प्रक्रियाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक स्थायी और समावेशी शांति की कल्पना अधूरी रहेगी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संघर्षों के दौरान महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा केवल तत्काल नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इसके मानसिक और सामाजिक प्रभाव लंबे समय तक बने रहते हैं।
भारतीय महिला शांति रक्षकों का उल्लेखनीय योगदान
भारत ने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महिला शांति रक्षकों के योगदान को भी प्रमुखता से रखा। राजदूत हरीश ने याद दिलाया कि भारत ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत दुनिया की पहली पूर्ण महिला पुलिस इकाई तैनात की थी। इस पहल ने स्थानीय महिलाओं को पुलिस सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और महिला नेतृत्व को नई पहचान दी।
वर्तमान में विभिन्न संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में 160 से अधिक भारतीय महिला शांति रक्षक अपनी सेवाएं दे रही हैं।
क्षमता निर्माण में भी अग्रणी भूमिका
भारत ने यह भी बताया कि वह केवल शांति अभियानों में भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिला नेतृत्व और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
नई दिल्ली स्थित ‘सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग’ वर्ष 2016 से दुनिया भर की महिला सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहा है। इसके अलावा भारत ने हाल के वर्षों में महिला शांति रक्षकों और महिला सैन्य अधिकारियों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और सम्मेलनों की मेजबानी भी की है।
वैश्विक मंच पर भारत का स्पष्ट संदेश
यूएनएससी की इस बहस में भारत का संदेश स्पष्ट रहा कि शांति, सुरक्षा और विकास के वैश्विक एजेंडे में महिलाओं की भूमिका को केंद्र में रखना समय की आवश्यकता है। भारत का मानना है कि महिलाओं को केवल संघर्षों की पीड़ित के रूप में नहीं, बल्कि शांति निर्माण और नेतृत्व की महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस बहस के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता, महिला नेतृत्व और समावेशी शांति व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।



