Entertainment/Lifestyle Update: मां-बेटी के झगड़े क्यों बढ़ जाते हैं टीनएज में? काजोल और नीसा देवगन के उदाहरण से समझें

किशोरावस्था में बदलती सोच और भावनाएं बनती हैं टकराव की वजह, जानिए कैसे संभालें रिश्ते

Entertainment/Lifestyle Update: बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान खुलासा किया कि जब उनकी बेटी नीसा देवगन 12 साल की थीं, तब मां-बेटी के बीच अक्सर झगड़े होते थे। यहां तक कि एक बार गुस्से में उन्होंने फोन भी तोड़ दिया था। यह घटना केवल एक सेलिब्रिटी परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि हर उस घर की हकीकत है जहां बच्चे टीनएज में प्रवेश करते हैं।


टीनएज में क्यों बढ़ते हैं झगड़े?

विशेषज्ञों के अनुसार, 12 से 17 साल की उम्र ऐसा दौर होता है जब बच्चों के अंदर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव तेजी से होते हैं। इस दौरान उनका दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता, खासकर वह हिस्सा जो निर्णय लेने, भावनाओं को नियंत्रित करने और दूसरों के नजरिए को समझने में मदद करता है। यही कारण है कि कई बार माता-पिता की सामान्य चिंता भी बच्चों को रोक-टोक या आलोचना जैसी लगती है।

इसके अलावा, इस उम्र में बच्चे अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें स्वतंत्रता मिले और उनके फैसलों को महत्व दिया जाए। ऐसे में जब मां उन्हें सलाह देती है या सुधारने की कोशिश करती है, तो यह उन्हें नियंत्रण जैसा महसूस हो सकता है, जिससे टकराव बढ़ता है।

भावनात्मक स्तर पर भी यह समय काफी संवेदनशील होता है। टीनएजर्स अपनी भावनाओं को पूरी तरह संभाल नहीं पाते, इसलिए छोटी-छोटी बातें भी उन्हें ज्यादा प्रभावित कर सकती हैं। मां के लिए जो बात सामान्य होती है, वही बेटी के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।


यह प्यार की कमी नहीं, बल्कि बदलाव का दौर है

मां-बेटी के बीच होने वाले ये झगड़े अक्सर गलत समझ लिए जाते हैं, लेकिन असल में यह रिश्ते में दूरी नहीं बल्कि विकास का संकेत होते हैं। यह वह समय होता है जब बच्चा धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहा होता है। इसलिए इन परिस्थितियों को समझदारी और धैर्य के साथ संभालना बेहद जरूरी होता है।

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मां कैसे संभालें स्थिति?

इस दौर में मां की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। सबसे जरूरी है कि वह बेटी की बात ध्यान से सुने, बिना तुरंत प्रतिक्रिया दिए। जब बच्चा खुद को सुना हुआ महसूस करता है, तो उसका गुस्सा अपने आप कम होने लगता है।

हर छोटी बात पर सख्ती दिखाने के बजाय केवल जरूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। इससे अनावश्यक बहस से बचा जा सकता है। साथ ही, बेटी की भावनाओं को समझने की कोशिश करना जरूरी है, भले ही आप उसकी हर बात से सहमत न हों।

मां को अपनी भावनाएं भी खुलकर और ईमानदारी से व्यक्त करनी चाहिए, लेकिन इस तरह कि बच्चा दबाव महसूस न करे। और अगर गलती हो जाए, तो माफी मांगना भी उतना ही जरूरी है—यह बच्चे को जिम्मेदारी और विनम्रता सिखाता है।


बेटियों को क्या समझना चाहिए?

टीनएज बेटियों को यह समझना जरूरी है कि मां का व्यवहार कभी-कभी सख्त लग सकता है, लेकिन उसके पीछे चिंता और प्यार होता है। इसलिए उनके लहजे पर ध्यान देने के बजाय उनकी भावना को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

अगर किसी बात से परेशानी हो, तो झगड़ा करने के बजाय शांति से अपनी बात रखना और थोड़ा स्पेस मांगना बेहतर तरीका होता है। साथ ही, अपनी छोटी-छोटी बातें मां से साझा करने से भरोसा मजबूत होता है और गलतफहमियां कम होती हैं।

धैर्य रखना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि मां भी इस बदलाव के दौर को समझने की कोशिश कर रही होती है। और अगर झगड़ा हो जाए, तो बाद में सुलह करना—जैसे ‘सॉरी’ कहना—रिश्ते को मजबूत बनाए रखता है।

किशोरावस्था में मां-बेटी के बीच होने वाले झगड़े एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह रिश्ते के टूटने का संकेत नहीं, बल्कि उसके बदलने और विकसित होने का संकेत है। इस दौर में सबसे जरूरी है—बातचीत बनाए रखना। क्योंकि वही परिवार मजबूत बनते हैं, जो झगड़ों से नहीं, बल्कि संवाद से अपने रिश्तों को संभालते हैं।

Written By: Anushri Yadav

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