
UP APO-2025: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सहायक अभियोजन अधिकारी यानी APO-2025 भर्ती में आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को ओपन कैटेगरी में शामिल किए जाने के तरीके पर UPPSC से स्पष्ट जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को होगी।
321 OBC और 43 SC अभ्यर्थियों पर कोर्ट का सवाल
UPPSC ने हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया कि अंतिम ओपन कैटेगरी के अभ्यर्थी से अधिक अंक हासिल करने वाले 321 OBC, 131 EWS और 43 SC अभ्यर्थी हैं। आयोग के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों को अंतिम चयन के समय संबंधित विज्ञापन और लागू नियमों के अनुसार अनारक्षित श्रेणी में माइग्रेट किया जाएगा।
हालांकि, हाई कोर्ट ने आयोग के इस जवाब को पहले दिए गए निर्देशों का पूर्ण अनुपालन नहीं माना। अदालत ने आयोग से इस संबंध में अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा है।
APO प्रीलिम्स की मेरिट पर उठा सवाल
जस्टिस मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने पूछा कि APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा की मेरिट सूची तैयार करते समय ओपन कैटेगरी में केवल अनारक्षित अभ्यर्थियों को शामिल किया गया था या आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के अभ्यर्थियों के प्रदर्शन को आधार बनाया गया था।
अदालत ने विशेष रूप से आयोग से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि 321 OBC और 43 SC अभ्यर्थियों को ओपन यानी अनारक्षित कैटेगरी में स्थान दिया गया था या नहीं।
आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के माइग्रेशन का मुद्दा
मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि आरक्षित वर्ग का कोई अभ्यर्थी यदि सामान्य कटऑफ से अधिक अंक हासिल करता है, तो उसे ओपन कैटेगरी में किस चरण पर और किस नियम के तहत स्थान दिया जाता है।
हाई कोर्ट के सवालों से संकेत मिलता है कि APO-2025 की प्रारंभिक परीक्षा में मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया और आरक्षित वर्ग के अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों के माइग्रेशन की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।
प्रीलिम्स रिजल्ट को दी गई है चुनौती
इस मामले में दाखिल याचिका में आरक्षण नियमों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी गई है। याचिका में रिजल्ट दोबारा घोषित करने की मांग भी की गई है।
याचिका लंबित रहने के दौरान ही UPPSC ने 28 से 30 जून के बीच APO-2025 की मुख्य परीक्षा आयोजित कराई थी। इसके अलावा आयोग के 9 जनवरी 2020 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम को भी चुनौती दी गई है।
21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अब UPPSC के अगले हलफनामे से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि APO-2025 प्रारंभिक परीक्षा में ओपन कैटेगरी की मेरिट सूची किस पद्धति से तैयार की गई थी और अधिक अंक हासिल करने वाले OBC तथा SC अभ्यर्थियों को किस श्रेणी में रखा गया।
मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे होगी। हाई कोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद APO-2025 की चयन प्रक्रिया में मेरिट, आरक्षण और कैटेगरी माइग्रेशन को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।



