
100वां वर्ष पद्मनाभ स्वामी मंदिर की थीम
कोलकाता के कारीगर भव्य विद्युत सजावट
धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन आयोजन
आस्था, परंपरा और भव्यता का गवाह बन चुका बाई का बाग दुर्गा पूजा बारवारी इस वर्ष अपने शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक बनाने जा रहा है। नगर की प्राचीनतम एवं प्रतिष्ठित दुर्गा पूजा समितियों में अग्रणी स्थान रखने वाली इस बारवारी में शताब्दी वर्ष को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर चल रही हैं। हर वर्ष अपनी आकर्षक साज-सज्जा, भव्य पंडाल और सांस्कृतिक आयोजनों से श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करने वाली बाई का बाग दुर्गा पूजा बारवारी इस बार कुछ ऐसा करने जा रही है, जिसे देखने के लिए शहरवासियों में अभी से उत्सुकता दिखाई दे रही है।
तीन महीने से दिन-रात जुटे कारीगर
शताब्दी वर्ष के अवसर पर पूजा पंडाल को केरल के विश्वप्रसिद्ध पद्मनाभ स्वामी मंदिर की भव्य स्थापत्य शैली में तैयार किया जा रहा है। पंडाल निर्माण के लिए कोलकाता से विशेष रूप से आए कारीगर पिछले करीब तीन महीने से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। विशाल पंडाल को आकर्षक एवं जीवंत स्वरूप देने के लिए बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पूजा संयोजक,मीडिया प्रभारी एवं जनसंपर्क अधिकारी लालू मित्तल एवं मयंक शुक्ला ने बताया कि इस बार पंडाल की सजावट में पद्मनाभ स्वामी मंदिर की भव्यता के साथ शयन मुद्रा में विराजमान भगवान विष्णु के विराट स्वरूप और वैभव को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। मंदिर तहखाना में छिपी अकूत संपत्ति , खजाने की प्रसिद्ध अवधारणा को भी पंडाल की थीम में आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने की तैयारी है। अध्यक्ष जयंत श्रीधर जोशी,कार्यकारी अध्यक्ष राजू द्विवेदी , टी.पी. मिश्रा , राजेश मलिक सुब्रतो घोष, सचिव रत्नेश पांडे, पवन शुक्ला,सुनील सिंह ने बताया कि शताब्दी वर्ष को लेकर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों में खासा उत्साह है। सौ वर्ष की इस गौरवशाली परंपरा को यादगार बनाने के लिए पूजा पंडाल, विद्युत सजावट, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष स्वरूप दिया जा रहा है। समिति ने बताया कि बाई का बाग दुर्गा पूजा बारवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष दर वर्ष यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस आयोजन के प्रति लोगों की गहरी आस्था और जुड़ाव को दर्शाती है।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



