
Uttar Pradesh Lucknow: देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश में काम करने वाले लाखों श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए मई का महीना बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। योगी आदित्यनाथ सरकार नए श्रम कानूनों को लागू करने की तैयारी में है, जिससे काम के घंटे, सैलरी स्ट्रक्चर, पीएफ, ग्रेच्युटी और ओवरटाइम जैसे कई अहम नियम बदल जाएंगे। इन बदलावों का असर प्राइवेट कंपनियों से लेकर गिग वर्कर्स तक सभी पर पड़ेगा।
सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों के तहत कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन 8 घंटे काम तय किया जाएगा। इसके अलावा यदि कोई कर्मचारी 15 मिनट से अधिक अतिरिक्त काम करता है, तो उसे ओवरटाइम के रूप में दोगुना भुगतान मिलेगा। यह प्रावधान खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए राहत भरा है, जो लंबे समय तक बिना अतिरिक्त भुगतान के काम करने को मजबूर होते हैं।
हालांकि इन नए नियमों के साथ एक बड़ा बदलाव सैलरी स्ट्रक्चर में भी देखने को मिलेगा। नए प्रावधानों के अनुसार किसी भी कर्मचारी के कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा बेसिक सैलरी माना जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, लेकिन हाथ में मिलने वाली इनहैंड सैलरी कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि लंबे समय में यह कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करेगा।
इन श्रम सुधारों का आधार केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार प्रमुख कानून हैं—वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020। इन कानूनों के जरिए पुराने 29 जटिल श्रम कानूनों को सरल बनाकर एकीकृत किया गया है, ताकि श्रमिकों को बेहतर सुरक्षा और स्पष्ट नियम मिल सकें।
नई व्यवस्था में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स, जैसे कि फूड डिलीवरी और ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े लोग, भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे। कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुरक्षा फंड में जमा करना होगा। इसके अलावा कार्य के दौरान या कार्यस्थल आने-जाने में होने वाली दुर्घटनाओं को भी काम से जुड़ा माना जाएगा।
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सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई और अहम प्रावधान भी किए हैं। अब सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य होगा और केंद्र सरकार द्वारा तय फ्लोर वेज से नीचे कोई भी राज्य वेतन निर्धारित नहीं कर सकेगा। साथ ही, कर्मचारियों का वेतन हर महीने की 7 तारीख तक देना अनिवार्य होगा और समान काम के लिए समान वेतन का नियम सख्ती से लागू किया जाएगा।
छंटनी और हड़ताल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। अब 300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों को ही छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी, जबकि पहले यह सीमा 100 थी। छंटनी की स्थिति में कर्मचारियों के लिए ‘री-स्किलिंग फंड’ में 15 दिन का वेतन जमा करना अनिवार्य होगा। वहीं हड़ताल से पहले 14 दिन का नोटिस देना भी जरूरी कर दिया गया है।
इसके अलावा, 20 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में शिकायत निवारण समिति बनाना अनिवार्य होगा। महिलाओं को सभी शिफ्टों में काम करने की अनुमति दी गई है, जिससे कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा। छोटे उल्लंघनों के मामलों में पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, जबकि गंभीर मामलों में 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में लागू होने जा रहे ये नए श्रम कानून कर्मचारियों के लिए एक तरफ जहां सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करेंगे, वहीं दूसरी तरफ सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के कारण कुछ तात्कालिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। अब देखना होगा कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन हो पाता है और श्रमिकों को इसका कितना वास्तविक लाभ मिलता है।
Written By: Anushri Yadav



