सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को “आया राम, गया राम” जैसी राजनीतिक स्थिति से जोड़ते हुए टिप्पणी की। दानम नागेंद्र ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा गया था।
क्या है पूरा मामला?
दानम नागेंद्र ने 2023 के विधानसभा चुनाव में BRS के टिकट पर खैराताबाद सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिकंदराबाद सीट से चुनाव लड़ा।
इसी आधार पर उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग उठी थी। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं, लेकिन बाद में मामला हाई कोर्ट पहुंच गया।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था?
तेलंगाना हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को रद्द करते हुए कहा था कि दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना दलबदल की श्रेणी में आता है। अदालत ने माना कि कांग्रेस उम्मीदवार बनने के साथ ही दानम नागेंद्र की सदस्यता समाप्त मानी जाएगी।
इसके साथ ही खैराताबाद विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करने का रास्ता साफ हो गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को प्रभावी रहने दिया।
अब खैराताबाद विधानसभा सीट खाली रहेगी और आगे की प्रक्रिया चुनाव आयोग तथा संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के स्तर पर तय होगी।
फैसले के बाद क्या बोले नागेंद्र?
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद दानम नागेंद्र ने कहा कि वह अदालत के आदेश का सम्मान करते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जब भी चुनाव होंगे, वह फिर जनता के बीच जाएंगे और अपनी राजनीतिक ताकत साबित करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दानम नागेंद्र को कानूनी राहत नहीं मिली है। वहीं तेलंगाना में दलबदल विरोधी कानून को लेकर यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें खैराताबाद सीट पर होने वाले अगले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।