
Sujit Sinha Encounter: झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार देर रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। हत्या, रंगदारी, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत 75 से अधिक मामलों में आरोपी सुजीत सिन्हा लंबे समय से झारखंड के कई जिलों में आतंक का पर्याय बना हुआ था। उसके एनकाउंटर का घटनाक्रम सामने आने के बाद इसकी तुलना उत्तर प्रदेश के चर्चित विकास दुबे एनकाउंटर से की जाने लगी है। दोनों मामलों में पुलिस हिरासत, फरार होने की कोशिश और मुठभेड़ की कहानी में कई समानताएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
दरअसल, सुजीत सिन्हा पलामू के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। पुलिस के अनुसार, जेल में बंद रहने के बावजूद वह अपने गिरोह का संचालन कर रहा था। इसी वजह से उसे साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित किया जा रहा था। रविवार रात जब पुलिस का काफिला जामताड़ा जिले में साहिबगंज-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुपाईडीह और केंदबोना के बीच पहुंचा, तभी सुरक्षा काफिले की एक गाड़ी का अगला टायर पंचर हो गया।
पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान सुजीत सिन्हा को दूसरे वाहन में बैठाने की तैयारी चल रही थी। आरोप है कि उसने मौके का फायदा उठाकर एक जवान का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि भागते समय उसने सुरक्षाकर्मियों पर फायरिंग भी की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इस घटनाक्रम ने वर्ष 2020 के विकास दुबे एनकाउंटर की याद ताजा कर दी। कानपुर के बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे को उत्तर प्रदेश एसटीएफ उज्जैन से कानपुर ला रही थी। पुलिस के अनुसार, रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनकर भागने की कोशिश की थी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया था।
दोनों मामलों में पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने हिरासत के दौरान मौके का फायदा उठाकर हथियार छीना और भागने का प्रयास किया, जिसके बाद जवाबी फायरिंग में उनकी मौत हुई। हालांकि दोनों घटनाओं में परिस्थितियां अलग थीं। विकास दुबे के मामले में वाहन पलटने की बात सामने आई थी, जबकि सुजीत सिन्हा के मामले में पुलिस काफिले की गाड़ी का टायर पंचर होने के बाद घटनाक्रम शुरू हुआ।
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एनकाउंटर के बाद सोमवार सुबह बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। जामताड़ा पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर फॉरेंसिक जांच कराई और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार पोस्टमार्टम डॉक्टरों के बोर्ड से कराया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जा रही है। साथ ही मुठभेड़ की मजिस्ट्रेट जांच भी शुरू कर दी गई है।
मेदिनीनगर (पलामू) निवासी सुजीत सिन्हा ने अपराध की दुनिया में हजारीबाग के कुख्यात अपराधी सुशील श्रीवास्तव के शूटर के रूप में कदम रखा था। बाद में उसने अपना अलग गैंग बना लिया और धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, पलामू, लातेहार और चतरा समेत कई जिलों में रंगदारी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका गिरोह कोयला कारोबारियों, रेलवे ठेकेदारों, बिल्डरों और अन्य व्यापारियों से लेवी वसूलने के लिए कुख्यात था। जांच एजेंसियों का दावा है कि जेल में रहने के बावजूद वह मोबाइल और अपने गुर्गों के जरिए पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
फिलहाल पुलिस मुठभेड़ की जांच जारी है और मजिस्ट्रेट जांच की रिपोर्ट के बाद ही पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



