
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली और बाराबंकी दौरे पर पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर और गोरक्षा को लेकर दिए गए अपने बयानों से नई राजनीतिक और धार्मिक बहस छेड़ दी है। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने के समर्थन में चलाए जा रहे अपने अभियान के दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में वर्तमान स्वरूप में बना राम मंदिर उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय जैसा प्रतीत होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब मंदिर का निर्माण पूरी तरह पूरा हो जाएगा, तब वह स्वयं भी वहां दर्शन करने जाएंगे।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण से जुड़े धार्मिक और पारंपरिक पहलुओं पर अपनी राय रखना है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले भी मंदिर निर्माण के दौरान वैदिक विधि-विधान का पालन किए जाने की बात कही थी। उनका कहना था कि यदि सभी धार्मिक परंपराओं का पूरी तरह पालन किया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी।
अपने दौरे के दौरान शंकराचार्य ने गोरक्षा के मुद्दे को सबसे प्रमुख बताया। उन्होंने लोगों से गाय की रक्षा करने की अपील करते हुए कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में पूजनीय माता का स्थान रखती है। उनके अनुसार समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए गोवंश की रक्षा आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे गोसेवा और गोसंरक्षण के अभियान से जुड़ें तथा गाय के प्रति सम्मान का भाव रखें।
बाराबंकी के त्रिवेदीगंज क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो दल चुनाव के समय गाय को माता कहकर जनता का समर्थन हासिल करते हैं, उन्हें सत्ता में आने के बाद भी उसी भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी राजनीतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का निर्णय लेगा, उनका समर्थन उसी दल को मिलेगा। साथ ही उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि जो लोग गाय को केवल पशु मानते हैं, उन्हें सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।
राम मंदिर निर्माण को लेकर भी शंकराचार्य ने दावा किया कि अयोध्या में मंदिर निर्माण का रास्ता उनके द्वारा दायर कानूनी प्रयासों से भी प्रशस्त हुआ था। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने समय-समय पर अपनी धार्मिक राय रखी, लेकिन कई सुझावों को स्वीकार नहीं किया गया। उनके अनुसार मंदिर का निर्माण पूरी तरह पूरा होने के बाद वह स्वयं अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन करेंगे।
शंकराचार्य के इन बयानों के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर उनके समर्थक इसे धार्मिक दृष्टिकोण बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके बयान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।



