
प्रयागराज। शहर में सहालग का सीजन शुरू होते ही जहां एक ओर शादियों की धूम देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम ने आम लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। बारातों की चकाचौंध और डीजे की धुनों के बीच ट्रैफिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिसका खामियाजा आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।
शाम ढलते ही शहर की मुख्य सड़कों पर बारातों का कब्जा हो जाता है। घोड़ी, बैंड-बाजा और डीजे के साथ नाचते-गाते बाराती पूरी सड़क घेर लेते हैं। इस दौरान न तो ट्रैफिक को नियंत्रित करने का कोई इंतजाम दिखता है और न ही वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाती है। नतीजतन, वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और लोग घंटों जाम में फंसे रहने को मजबूर हो जाते हैं।
कीडगंज के रहने वाले संतोष कुमार ने बताया कि कई बार एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंस जाती हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऑफिस से लौटने वाले कर्मचारी, मरीज और छात्र सभी इस अव्यवस्था से खासे परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस इस समस्या को लेकर पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है। भरत ने बताया कि रात में घर पहुंचने में कई-कई घंटे लग जाते हैं। कोई सुनवाई नहीं है। बारात वाले पूरी सड़क घेर लेते हैं और पुलिस कहीं दिखाई नहीं देती।”
वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।हालांकि, ट्रैफिक नियमों के तहत सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह से जाम लगाना और यातायात बाधित करना प्रतिबंधित है, लेकिन इन नियमों का पालन कराना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कई बार पुलिस मौके पर पहुंचती भी है, तो केवल औपचारिकता निभाकर लौट जाती है, जिससे बारातियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
Also Read: Tech Jobs India: फेसबुक में जॉब पाने के लिए जानें जरूरी स्किल्स, इंटरव्यू प्रोसेस और शुरुआती पैकेज
इस समस्या के समाधान के लिए सख्त नियमों का पालन कराना जरूरी है। बारात निकालने के लिए निर्धारित समय और मार्ग तय किए जाएं, साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो। इसके अलावा, ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता और निगरानी बढ़ाने की भी जरूरत है। शहरियों का कहना है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दे और ठोस कदम उठाए। वरना आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकराल हो सकती है। फिलहाल, बारातियों की मौज आम जनता के लिए भारी पड़ रही है और लोग रोजाना इस अव्यवस्था का सामना करने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट- आकाश त्रिपाठी


