
Pratapgarh News:पट्टी कोतवाली के बाथरूम में फांसी लगाकर जान देने वाले दलित युवक के परिजनों से मिलने जा रहे सपा विधायक राम सिंह को पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया। विधायक के साथ सपा जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी और सांसद प्रतिनिधि बीएल पटेल , मो वाशिक खान एडवोकेट जिला उपाध्यक्ष सपा धीरज यादव आदि मौजूद रहे। पुलिस के रोके जाने पर विधायक ने शासन-प्रशासन पर जमकर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस सरकार में अब संवेदना जताने पर भी रोक लगा दी गई है।
युवक की मौत के बाद पुलिस महकमे में भी कार्रवाई हुई है। एसपी ने पट्टी कोतवाली के इंस्पेक्टर आनंदपाल सिंह और उपनिरीक्षक ओंकार सिंह को निलंबित कर दिया है। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो चुका है। जिलाधिकारी ने भी मामले में मजिस्ट्रेटी जांच की संस्तुति की है।इसके बावजूद सपा नेताओं को पीड़ित परिवार तक पहुंचने से रोके जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विधायक का कहना था कि दुख की इस घड़ी में परिवार से मिलकर संवेदना जताना भी यदि प्रशासन को मंजूर नहीं है तो यह गंभीर स्थिति है।
एक परिवार के आंसू दिखे, दूसरे की पीड़ा क्यों ओझल?
पूरे प्रकरण में एक दूसरा परिवार भी है, जिसकी पीड़ा पर अपेक्षाकृत कम चर्चा हो रही है। जिस गरीब ब्राह्मण परिवार की बेटी को युवक अपने साथ ले गया था, उस परिवार को भी सामाजिक उलाहना और भय के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। बेटी के इस तरह चले जाने के बाद परिजनों की सामाजिक प्रतिष्ठा पर असर पड़ा और वे लगातार मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
युवक की मौत की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन उस परिवार की पीड़ा भी जांच और प्रशासनिक संवेदना के दायरे में आनी चाहिए, जिसकी बेटी इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी बनी। सवाल यही है कि कार्रवाई और संवेदना का दायरा सिर्फ एक पक्ष तक सीमित रहेगा या पूरे घटनाक्रम के दोनों प्रभावित परिवारों को न्याय मिलेगा l
रिपोर्ट-उमेश पाण्डेय जिला संवाद दाता यूनाईटेड भारत



