
Kangana Ranaut: पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर बीजेपी नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए खड़गे पर निशाना साधते हुए उनके बयान को ‘घटिया और सड़कछाप राजनीति’ बताया। वहीं, बीजेपी नेता स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं।
यह विवाद बिहार की राजधानी पटना में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। खड़गे के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान भी किया है।
कंगना रनौत ने खड़गे पर क्यों साधा निशाना?
कंगना रनौत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर मल्लिकार्जुन खड़गे का वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर टिप्पणी करते सुनाई देते हैं। कंगना ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली भाषा के लिहाज से अनुचित बताया।
कंगना ने अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीति में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किस स्तर को दर्शाता है। इसी के साथ उन्होंने बयान को ‘घटिया और सड़कछाप’ राजनीति करार दिया।
कंगना की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बीजेपी नेताओं की ओर से भी खड़गे की टिप्पणी को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर खड़गे के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पिता को लेकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल कांग्रेस की राजनीतिक हताशा को दिखाता है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि जब राजनीतिक बहस नीतियों और मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच जाती है, तो इससे लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा प्रभावित होती है। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक विरोध के दौरान व्यक्तिगत अपमान को हथियार बनाने का आरोप भी लगाया।
ईरानी ने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी के परिवार पर अपमानजनक टिप्पणी करना न तो साहस है और न ही राजनीति का उचित तरीका। उनके मुताबिक, जनता ऐसे आचरण का जवाब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से दे सकती है।
हालांकि, ये प्रतिक्रियाएं बीजेपी नेताओं के राजनीतिक विचार और आरोप हैं। इस विवाद के बीच मूल बयान का संदर्भ और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं।
चिराग पासवान ने भी जताई आपत्ति
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी खड़गे की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि बिहार की धरती से प्रधानमंत्री को लेकर इस तरह का बयान सामने आना उचित नहीं है।
चिराग पासवान ने जोर दिया कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद होना सामान्य बात है। सरकार के फैसलों और नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और पद की गरिमा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उन्होंने राजनीतिक विरोध को तथ्यों और तर्कों पर आधारित रखने की बात कही। इस तरह बीजेपी के कई नेताओं ने खड़गे की टिप्पणी को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
पटना में खड़गे ने क्या कहा था?
पूरा विवाद पटना में डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संबोधन दे रहे थे, तभी वहां मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा कि वह कहीं नहीं जाएंगे।
इस पर खड़गे ने जवाब देते हुए कहा, ‘मोदी का बाप भी जाएगा।’ उनकी इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी नेताओं ने विरोध जताया। विवाद के केंद्र में इसी बयान की भाषा और उसका संदर्भ है।
खड़गे की टिप्पणी पर बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कंगना रनौत, स्मृति ईरानी और चिराग पासवान सहित कई नेताओं ने सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
बीजेपी ने विरोध प्रदर्शन का किया ऐलान
खड़गे के बयान को लेकर बीजेपी ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के नेताओं ने इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री के प्रति अनुचित बताते हुए आलोचना की है।
इस घटनाक्रम ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव को एक नया मुद्दा दे दिया है। जहां बीजेपी नेता बयान की भाषा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं यह विवाद राजनीतिक संवाद के स्तर और सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले शब्दों को लेकर बहस भी सामने लाता है।
राजनीति में आलोचना और असहमति लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं। लेकिन इस तरह के विवादों में बयान के पूरे संदर्भ, संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक आरोपों के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। अब इस मामले में बीजेपी के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।



