नगर निगम के दफ्तर से लेकर मोहल्लों तक हैें आवारा कुत्तों का ‘राज’

From the municipal corporation office to the neighborhoods, stray dogs rule

शहर में एक ओर नगर निगम आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने और उन्हें पकड़ने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम परिसर और शहर के कई मोहल्लों में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोग अपने ही घरों तक पहुंचने के लिए रास्ता बदलने को मजबूर हैं। नगर निगम की लापरवाही अब आम जनता की सुरक्षा पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है।
शहर के दयियाबाद, राजापुर समेत कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड दिन-रात घूमते नजर आ रहे हैं। राहगीरों, बाइक सवारों और स्कूली बच्चों पर कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि कई बार सुबह और रात के समय कुत्तों का झुंड अचानक लोगों पर हमला कर देता है, जिससे मोहल्लों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर निगम परिसर के अंदर कुत्ते आराम फरमाते दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब नगर निगम अपने ही परिसर को कुत्तों से मुक्त नहीं रख पा रहा, तो पूरे शहर में नियंत्रण कैसे संभव होगा। स्थानीय लोगों ने नगर निगम के पशुधन अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। दयियाबाद निवासी रऊफ खान ने बताया कि पहले कुत्ते पकड़ने वाली टीम समय-समय पर मोहल्लों में आती थी, लेकिन अब कई महीनों से कोई टीम नजर नहीं आई है।

इसके चलते आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि रात के समय गलियों से निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार बाइक सवारों का पीछा करते हुए कुत्ते सड़क तक पहुंच जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। वहीं राजापुर निवासी अजय कुमार ने बताया कि नगर निगम की लापरवाही का खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले एक छोटे बच्चे पर कुछ दिन पहले कुत्तों ने हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

 

नगर निगम परिसर केअंदर आराम फरमाता

बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा। घटना के बाद से मोहल्ले के लोगों में डर का माहौल है और अभिभावक अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों से सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों और बुजुर्गों को है। सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले बुजुर्गों को कुत्तों के झुंड घेर लेते हैं, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चों का पीछा करना अब आम बात हो गई है। कई इलाकों में महिलाएं भी अकेले निकलने से बच रही हैं।

नगर निगम केवल कागजों में अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही। कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने के अभियान लंबे समय से ठप पड़े हैं। इसके कारण शहर में कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

 

 

 

नगर निगम परिसर केअंदर घुमता कुत्ता

नागरिकों ने मांग की है कि नगर निगम तत्काल विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनकी नसबंदी कराने की व्यवस्था करे। इस पर नगर निगम के पशुधन अधिकारी डॉ.विजय अमृत राज का कहना है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का कार्य किया जा रहा है, इसके तहत अब तक 25000 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। साथ ही प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से टीम भेजी जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

शहरवासियों का कहना है कि नगर निगम की यह लापरवाही आम जनता के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी

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