International News: अल-नीनो ने मचाया हाहाकार! फ्रांस में लाखों मुर्गियों की मौत, अब गायों पर भी मंडरा रहा बड़ा खतरा

यूरोप में भीषण गर्मी और अल-नीनो के असर से फ्रांस का पशुपालन सेक्टर बुरी तरह प्रभावित, लाखों मुर्गियों की मौत के बाद डेयरी उद्योग पर भी संकट गहराया।

International News: यूरोप की धरती इन दिनों जैसे आग में तप रही है… आसमान से बरसती यह गर्मी अब सिर्फ मौसम नहीं रही, बल्कि एक भयावह संकट का रूप ले चुकी है। फ्रांस में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि वहां का पशुपालन उद्योग गहरी तबाही के दौर से गुजर रहा है। लाखों मुर्गियों की मौत ने पूरे पोल्ट्री सेक्टर को हिला कर रख दिया है, और अब यही संकट गायों और डेयरी उत्पादन पर भी भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।

फ्रांस के ब्रिटनी और पेज़ द ला लॉयर जैसे प्रमुख पोल्ट्री क्षेत्र, जो देश की लगभग 60% मुर्गी उत्पादन क्षमता संभालते हैं, इस भीषण गर्मी की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। किसानों के मुताबिक हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि रोजाना सामान्य से कई गुना अधिक मुर्गियों की मौत हो रही है। पहले जहां एक-दो मामलों की आशंका रहती थी, वहीं अब सैकड़ों पक्षी रोजाना दम तोड़ रहे हैं। इस असामान्य मृत्यु दर ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है और नुकसान का सही आंकड़ा अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आया है।

सबसे बड़ी समस्या सिर्फ मौतों की नहीं है, बल्कि उनके प्रबंधन की भी है। इतनी बड़ी संख्या में मृत पक्षियों को हटाने के लिए उपलब्ध सेवाएं और संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं। कई इलाकों में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि प्रशासन को अस्थायी रूप से मृत पक्षियों को फार्म के आसपास ही दफनाने की अनुमति देने पर विचार करना पड़ा है। किसानों को संक्रमण और बदबू से बचाव के लिए लकड़ी के बुरादे जैसे अस्थायी उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।

लेकिन संकट सिर्फ पोल्ट्री तक सीमित नहीं है। फ्रांस का डेयरी सेक्टर भी इस गर्मी की चपेट में बुरी तरह आ गया है। अत्यधिक तापमान के कारण गायों ने चारा खाना कम कर दिया है और पानी का सेवन बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ा है। कई फार्मों में दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। किसानों को लगातार पंखे और वेंटिलेशन सिस्टम चलाने पड़ रहे हैं, लेकिन बढ़ती गर्मी के आगे ये प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस असामान्य मौसम के पीछे अल-नीनो एक बड़ी वजह है। प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की यह प्राकृतिक घटना वैश्विक तापमान को प्रभावित करती है। जब अल-नीनो और ग्लोबल वार्मिंग एक साथ सक्रिय होते हैं, तो हीटवेव और अधिक खतरनाक और लंबी हो जाती है। यही कारण है कि यूरोप में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की जा रही है।

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विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में यह संकट सिर्फ पशुपालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य आपूर्ति और कृषि अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है। फ्रांस की यह स्थिति पूरे यूरोप के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है, जहां बदलता मौसम अब जीवन और जीविका दोनों पर सीधा प्रहार कर रहा है।

फिलहाल हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन एक बात साफ है—यह संकट सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य की एक बड़ी चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

Written By: Ekta Verma

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