
CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन यदि किसी भी पक्ष ने कानून से परे जाकर अत्यधिक बल प्रयोग किया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच आवश्यक है कि हिंसा के लिए छात्र, पुलिस या बाहरी तत्वों में से कौन जिम्मेदार था।
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से दायर याचिकाओं में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान लगभग 250 पुलिसकर्मी घायल हुए। वहीं छात्रों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं गोपाल शंकरनारायणन, शादान फरासत और प्रशांत भूषण ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों पर निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किए बिना पैलेट गन, इलेक्ट्रिक शॉक गन, इलेक्ट्रिक बैटन और कथित तौर पर कीलों वाली लाठियों का इस्तेमाल किया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि कई सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग किया और कई वर्दीधारी कर्मियों की वर्दी पर नाम पट्टी भी नहीं थी। याचिकाकर्ताओं ने फेसियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए प्रदर्शनकारियों की पहचान कर कथित उत्पीड़न रोकने की भी मांग की।
याचिकाकर्ताओं ने देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कई मामलों का भी उल्लेख किया। अदालत को बताया गया कि कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से एक 19 वर्षीय युवक की आंखों की रोशनी चली गई, जबकि एक घायल युवती आईसीयू में भर्ती है। बिहार में एके-47 से जुड़े कथित घटनाक्रम, मुंबई में प्रदर्शनकारी को फर्जी मादक पदार्थ मामले में फंसाने की कथित धमकी, दिल्ली में महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का वायरल वीडियो, पत्रकारों और वकीलों पर हमलों तथा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की शिकायतों का भी अदालत में जिक्र किया गया। सांसद मनोज झा की ओर से दायर याचिका के माध्यम से जुनैद मलिक का मामला भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रदर्शनों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश दिए हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस प्रोटोकॉल की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “जिसने भी ज्यादती की है, उसकी जांच होनी चाहिए।” जांच के लिए प्रशांत भूषण ने दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के नाम सुझाए, जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जांच की रूपरेखा तय करना अदालत का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी करते हुए सभी सीसीटीवी फुटेज, लॉग बुक और अन्य संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने जुनैद मलिक से जुड़े मामले की सुनवाई अगले दिन तय की है, जबकि अन्य याचिकाओं पर अगली सुनवाई अगले सोमवार होगी।
इसके अलावा अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया है और जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है अथवा जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



