Baliya News-अकेले विधायक होकर भी सदन में बुलंद रही उमाशंकर सिंह की आवाज, सियासी गलियारों में आज भी चर्चा

Ballia News: Even as a lone MLA, Umashankar Singh’s voice resonated powerfully in the Housea topic that remains a subject of discussion in political circles to this day.

Baliya News-रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का राजनीतिक अंदाज हमेशा चर्चा में रहा। विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के अकेले विधायक होने के बावजूद उन्होंने जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया और सत्ता पक्ष के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने में कभी पीछे नहीं हटे।

विधानसभा के एक प्रसंग का जिक्र करते हुए बताया जाता है कि जब सदन में उनकी बात पर चुटकी लेते हुए कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया, तब भी उमाशंकर सिंह अपने तेवर से पीछे नहीं हटे। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ सत्ता पक्ष को जवाब देते हुए कहा था कि आज जो लोग उनकी ओर देखकर हंस रहे हैं और सत्ता के गलियारों में बैठे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी राजनीतिक यात्रा में बहुजन समाज पार्टी की नर्सरी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

लगातार तीन चुनाव में दर्ज की जीत

उमाशंकर सिंह ने रसड़ा विधानसभा सीट से वर्ष 2012, 2017 और 2022 में लगातार जीत हासिल की। लगातार तीन चुनावों में जीत ने क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ और जनाधार को दर्शाया। जनसेवा और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने के कारण पूर्वांचल की राजनीति में उनकी अलग पहचान बनी।

विधानसभा में वे क्षेत्रीय समस्याओं के साथ-साथ जनता से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाते रहे। संख्या बल कम होने के बावजूद सदन में उनकी सक्रियता और स्पष्ट वक्तव्य अक्सर चर्चा का विषय बनते थे।

दलों की सीमाओं से अलग व्यक्तिगत रिश्ते

राजनीतिक मतभेद अपनी जगह रहे, लेकिन उमाशंकर सिंह के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत और आत्मीय संबंध भी बताए जाते रहे हैं। वे राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत संबंधों के बीच आने नहीं देते थे। यही वजह रही कि अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच भी उनके प्रति सम्मान का भाव दिखाई देता था।

जनपद मऊ के टड़ियाव (कोपागंज) निवासी समाजसेवी एवं अधिवक्ता सतीश कुमार पाण्डेय द्वारा साझा किए गए इस प्रसंग के जरिए उमाशंकर सिंह के राजनीतिक व्यक्तित्व के कई पहलू सामने आते हैं। यह घटना उनके राजनीतिक कौशल, पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता और अपनी बात को मजबूती से रखने की क्षमता को रेखांकित करती है।

उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर इस बात की मिसाल रहा कि सदन में संख्या कम होने के बावजूद प्रभावी और निर्भीक आवाज अपनी अलग पहचान बना सकती है।

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