
Ayushman Bharat 8 Years: आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) ने 23 सितंबर 2026 को अपने आठ साल पूरे कर लिए। साल 2018 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगे इलाज के खर्च से राहत देना और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। आठ साल के दौरान योजना का दायरा लगातार बढ़ा है और अब देश की बड़ी आबादी इसके तहत स्वास्थ्य कवर के दायरे में आ चुकी है।
सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 21 सितंबर 2026 तक 48.51 करोड़ से अधिक लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 31 अगस्त 2026 तक योजना के तहत करीब 13.25 करोड़ अस्पताल दाखिलों को मंजूरी दी गई, जिनका कुल मूल्य 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इन सेवाओं के लिए देशभर के 38 हजार से ज्यादा सरकारी और निजी अस्पताल योजना से जुड़े हुए हैं।
पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर
आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के तहत पात्र परिवारों को हर साल पांच लाख रुपये तक का कैशलेस अस्पताल इलाज कवर दिया जाता है। यह सुविधा मुख्य रूप से सेकेंडरी और टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाओं यानी गंभीर बीमारियों और विशेषज्ञ उपचार के लिए है।
योजना का एक अहम पहलू यह है कि लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं। इस व्यवस्था का मकसद यह है कि किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवार को इलाज के लिए अपनी बचत या उधार पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।
सरकार के अनुसार 13.25 करोड़ से ज्यादा अस्पताल दाखिलों के लिए 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उपचार राशि अधिकृत की जा चुकी है। ऐसे में योजना का विस्तार केवल कार्ड बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने वास्तविक अस्पताल सेवाओं का इस्तेमाल भी किया है।
आठ साल में लगातार बढ़ा योजना का दायरा
आयुष्मान भारत की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य के साथ की गई थी। शुरुआती तौर पर इसका फोकस आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर था, लेकिन समय के साथ इसके दायरे में अलग-अलग वर्गों को शामिल किया गया।
2024 में 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना योजना में शामिल करने का फैसला लिया गया। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार 21 सितंबर 2026 तक 1.36 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं के परिवारों को भी योजना का लाभ दिया गया है।
इस विस्तार से योजना का फोकस सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बुजुर्गों जैसे विशेष वर्गों के लिए भी स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा है।
आयुष्मान भारत सिर्फ एक योजना नहीं, बड़ा हेल्थ नेटवर्क
आयुष्मान भारत को केवल अस्पताल में इलाज उपलब्ध कराने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जाता। इसके साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा, डिजिटल हेल्थ और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कई दूसरी पहलें भी जुड़ी हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए लोगों को उनके आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। वहीं आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य पहचान और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
यानी आयुष्मान भारत का मॉडल अस्पताल में भर्ती होने के बाद इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैला हुआ है।
इलाज के खर्च का बोझ कम करने पर जोर
भारत में लंबे समय से स्वास्थ्य खर्च का एक बड़ा हिस्सा लोगों को अपनी जेब से उठाना पड़ता रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के जरिए इस आर्थिक बोझ को कम करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की अपनी जेब से होने वाली हिस्सेदारी 2014-15 में 62.6 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में घटकर 43.4 प्रतिशत रह गई। हालांकि इस बदलाव को केवल आयुष्मान भारत का परिणाम नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च और दूसरी स्वास्थ्य योजनाओं की भी भूमिका है।
पीएम मोदी ने आठ साल पूरे होने पर क्या कहा?
आयुष्मान भारत के आठ साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की पहुंच और इससे मिलने वाली स्वास्थ्य सुरक्षा को रेखांकित किया। सरकार के मुताबिक इस योजना के जरिए करोड़ों लोगों तक स्वास्थ्य कवरेज पहुंची है और बड़ी संख्या में लाभार्थियों को अस्पताल में इलाज की सुविधा मिली है।
सरकार का कहना है कि योजना के विस्तार से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारी के समय इलाज के खर्च को लेकर राहत मिली है। वहीं योजना से जुड़े अस्पतालों का नेटवर्क बढ़ने से अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में इलाज की सुविधा तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश हुई है।
आगे क्या है चुनौती?
आयुष्मान भारत ने आठ साल का सफर पूरा कर लिया है, लेकिन इतने बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम के सामने आगे भी कई चुनौतियां हैं। पात्र लोगों तक समय पर कार्ड और इलाज की सुविधा पहुंचाना, अस्पतालों के नेटवर्क को लगातार मजबूत करना, गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित करना और लाभार्थियों को योजना की सही जानकारी देना महत्वपूर्ण बना रहेगा।
आठ साल के आंकड़े बताते हैं कि योजना का विस्तार बड़े स्तर पर हुआ है। अब इसका अगला चरण केवल कवरेज बढ़ाने तक सीमित न रहकर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी पहुंच पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।



