Prayagraj News- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने श्री रामानंद ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए 1977 की डिक्री के निष्पादन से जुड़े मामले में अगली सुनवाई तक कार्यवाही पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश दिया।
दलील दी गई कि सीताराम प्रथम विपक्षी ने 1965 में रामानंद दास के खिलाफ वाद दायर किया था, जो 1972 में खारिज हो गया। प्रथम अपील में 25 मई 1977 को वाद डिक्री हुआ। इसके बाद द्वितीय अपील हाईकोर्ट में आई ।
अपील लंबित रहने के दौरान सीताराम ने 1993 में वाद दायर किया, जिसमें दोनों पक्षों ने समझौता किया और 24 अप्रैल 1996 को वाद समझौते के आधार पर डिक्री हुआ। रामानंद दास ने समझौते में अपने हिस्से की संपत्ति पर ट्रस्ट बनाया और 1999 में उनका निधन हो गया। द्वितीय अपील 9 नवंबर 2009 को समाप्त मानकर खारिज हुई। प्रतिस्थापन प्रार्थना पत्र 19 अक्टूबर 2023 को और उसके खिलाफ निगरानी 9 अगस्त 2024 को खारिज हुई।
कहा कि 1996 की डिक्री पर अमल हो चुका है, इसलिए 1977 की डिक्री का निष्पादन चलने योग्य नहीं है। धारा 47 सीपीसी की आपत्ति गलत तरीके से खारिज की गई।
विपक्षी अधिवक्ता ने कहा कि द्वितीय अपील समाप्त होकर खारिज हो चुकी है, इसलिए 1977 की डिक्री कायम है और डिक्रीधारक संपत्ति पाने का हकदार है। उन्होंने 1996 की समझौता डिक्री को मिलीभगत वाला बताया।
कोर्ट ने विपक्षियों को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया । अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026को होगी। तब तक निष्पादन वाद की कार्यवाही स्थगित रहेगी।



