काली स्वांग नृत्य नाटिका ने दर्शकों का मोहा मन

Kali Swang dance drama captivated the audience

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दीपावली शिल्प मेला के पांचवें दिन सोमवार की सांस्कृतिक संध्या लोकगीत, शास्त्रीय संगीत और लोकनृत्यों से सराबोर रही। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं, वहीं शिल्प हाट में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। लोगों ने दीपावली की खरीदारी के साथ भारतीय कला और लोक संस्कृति का आनंद उठाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. विवेक निगम (सेवानिवृत्त), इविंग क्रिश्चियन कॉलेज, प्रयागराज एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत सुभाष चंद्र यादव एवं दल के बिरहा गायन से हुई। कलाकारों ने हनुमान जी और माता अंजनी के मिलन प्रसंग पर आधारित बिरहा प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। ‘बिमानवां अकास में उड़ा, माई अंजन के करवा दे दर्शनवा’ की प्रस्तुति पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।

इसके बाद केंद्र की ओर से आयोजित ब्रह्मनाद प्रतियोगिता में शास्त्रीय वादन में प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले रतन श्री ने राग पुरिया धनश्री में बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। उनके वादन में आलाप, बंदिश, तान, झाला और मधुर धुन के साथ बांसुरी एवं तबले की सवाल-जवाब शैली ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबले पर आदित्य मिश्रा ने संगत में साथ दिया।
सोनभद्र से आए बनारसी एवं उनके साथी कलाकारों ने कर्मा और धावा पूर्वइया लोकनृत्यों की प्रस्तुति देकर क्षेत्रीय लोक परंपराओं की जीवंत झलक पेश की। इसके बाद प्रयागराज के रोहित काली ने काली स्वांग नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। संगत कलाकारों में देवानंद ने हारमोनियम, अशोक कुमार ने ढोलक, नरसिंह बहादुर ने करताल और रामनरेश ने मंजीरा पर संगत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकांक्षा पाल ने किया।
शिल्पकारों के उत्पाद लोगों को भा रहे हैं
दीपावली शिल्प मेले में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिल्पकारों की कलाकृतियां और हस्तनिर्मित उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पारंपरिक शिल्प, कलात्मक वस्तुओं और सजावटी उत्पादों के स्टॉल पर लोगों ने खरीदारी की। मेला शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराने के साथ ही भारतीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक कला को बढ़ावा दे रहा है।

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी

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