
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से आयोजित दीपावली शिल्प मेले के चौथे दिन रविवार की शाम लोकगीतों और लोकनृत्यों के नाम रही। बिरहा में भगवान राम और माता सीता के प्रसंग सुनकर दर्शक भावुक हुए, वहीं राजस्थानी चकरी, कालबेलिया और चरी नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उदय चन्द्र परदेशी, लोक कलाकार प्रयागराज व केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा और सलाहकार कल्पना सहाय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत शिवराज विश्वकर्मा और उनके दल के बिरहा गायन से हुई। कलाकारों ने भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने और माता सीता की मनोदशा से जुड़े प्रसंगों को बिरहा के माध्यम से पेश किया। ‘हजूर जीत के लौटे लंका, माई सीता के मन में शंका’ जैसे बोलों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। गायन में कथा, संवाद और भावनाओं का सुंदर मेल दर्शकों को देखने को मिला।
राजस्थान के बारां से आए एसबी गुजरावत ने चकरी, कालबेलिया और चरी लोकनृत्य प्रस्तुत दी l उनकी पारंपरिक वेशभूषा और लयबद्ध कदमों के साथ उनकी प्रस्तुतियों ने राजस्थान की लोकसंस्कृति की झलक दिखाई।
प्रयागराज की नर्गिस परवीन ने ‘राम जी से पूछे’, ‘हे गंगा मैया’, ‘मिर्जापुर कैला गुलजार’, ‘रेलिया बैरन’ और ‘सइयां मिले लड़कइयां’ पेश कर श्रोताओं का मन मोह लिया । वहीं रागिनी चन्द्रा ने ‘गंगा-जमुना के निर्मल धार’, ‘बीत जाला बरखा बहार बलम बिना’, ‘हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया’ और ‘हमको खर्च दिए जाना बलम जब जाना विदेशवा ना’ की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही पाई
इस अवसर पर केन्द्र निदेशक द्वारा सभी कलाकारों को अंगवस्त्र एवं पौधा भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आकांक्षा पाल ने किया l
रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी



