
अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी पर विशेष कार्यक्रम, वरिष्ठ नेताओं और संतों का जमावड़ा
प्रयागराज के केसर भवन के संघर्ष से लेकर राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक यादें हुईं ताजा
विश्व हिंदू परिषद के भूतपूर्व अंतराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद द्वारा मंगलवार को इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन कन्वेंशन सेंटर में किया गया। कार्यक्रम में अशोक सिंघल के विचारों, संघर्षों और राष्ट्र-निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राष्ट्र निर्माण और हिंदू एकजुटता ही अशोक सिंघल जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय सहित, महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंत्री और अलोपशंकरी शक्तिपीठ के प्रबंधक यमुनापुरी जी महाराज, अखिल भारतीय हेला समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष बृज मोहन, विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष कविंद्र प्रताप सिंह मौजूद रहें। कार्यक्रम का संचालन काशी प्रांत के मंत्री डॉ. राजनारायण के द्वारा किया गया।
राम मंदिर आंदोलन और हिंदू चेतना का शंखनाद
वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 500 से अधिक वर्षों के लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य राष्ट्र मंदिर बनकर तैयार हुआ है। यह देश के करोड़ों सनातनियों और हिंदू समाज की अभूतपूर्व एकजुटता का जीवंत प्रमाण है। 9 नवंबर 1989 के शिलान्यास और 6 दिसंबर की ऐतिहासिक घटनाओं का स्मरण करते हुए उन्होंंने बताया कि अशोक जी के मार्गदर्शन और पूज्य संतों के आशीर्वाद से ही यह संकल्प पूर्ण हो सका। इसी के साथ उन्होंने मीनाक्षीपुरम धर्मांतरण घटना के बाद शुरू हुए ‘विराट हिंदू समाज आंदोलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया।
केसर भवन और वेद विद्यालय का ऐतिहासिक संघर्ष
प्रयागराज स्थित केसर भवन में वेद विद्यालय की स्थापना की पृष्ठभूमि को याद करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत के कांची पीठ के शंकराचार्य जी की इच्छा अनुसार अशोक जी ने इस स्थान पर वेद विद्यालय बनाने का संकल्प लिया था। कार्यकर्ताओं के अनवरत परिश्रम, त्याग और कानूनी संघर्षों के बाद आज वहां भव्य वैदिक केंद्र और संगठन का कार्यालय संचालित हो रहा है।अंत में, संघ के ध्येय वाक्य ‘संगठन गढ़े चलो, भला हो जिसमें देश-समाज का आह्वान करते हुए सभी युवाओं, मातृशक्ति, संतों और कार्यकर्ताओं से सनातन संस्कृति और समाज को अटूट बनाए रखने को कहा।
जब माँ ने चाकू से अंगूठा चीरकर अशोक सिंघल को दिया था देशसेवा का तिलक – चंपत राय
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ प्रचारक स्वर्गीय अशोक सिंघल के जीवन से जुड़े कई अत्यंत प्रेरक और अनसुने संस्मरण साझा किए हैं। प्रयागराज के एक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पूज्य संतों, महापुरुषों और गणमान्य नागरिकों को संबोधित करते हुए चंपत राय ने स्पष्ट किया कि अशोक सिंघल केवल राम जन्मभूमि आंदोलन के ही कर्णधार नहीं थे, बल्कि वे संपूर्ण भारत की आंतरिक व सामाजिक समस्याओं पर दूरगामी विचार करने वाले युगद्रष्टा व्यक्तित्व थे। चंपत राय ने अशोक सिंघल के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने का संस्मरण सुनाते हुए बताया कि उनका परिवार मूलत: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले का निवासी था, लेकिन शासकीय सेवा के कारण 1935 में उनके पिता ने प्रयागराज में अपना मकान ‘महावीर भवन बनाया। यहाँ प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) के परिवार से उनकी गहरी आत्मीयता थी और रज्जू भैया ने ही उन्हें संघ कार्य से जोड़ा।
समृद्ध परिवार में जन्मे अशोक जी ने चुना त्यागमय जीवन- यमुनापुरी जी महाराज
मौका था अशोक सिंघल की शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह का। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंत्री और अलोपशंकरी शक्तिपीट के प्रबंधक यमुना पुरी जी महाराज ने अशोक सिंघल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल समृद्ध और सपंन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने त्यागमय और सादगी भरा जीवन चुना। इसी के साथ उन्होंने बताया कि एक अत्यंत समृद्ध व संपन्न परिवार से होने के बावजूद अशोक जी ने विलासिता को छोड़कर त्याग व तपस्या का मार्ग चुना।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



