JPSC Protest: छात्रों का आर-पार! आज झारखंड विधानसभा का घेराव, CBI जांच पर अड़ा पेंच

JPSC-JSSC भर्ती में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी, तीन दौर की बातचीत फेल होने के बाद विधानसभा मार्च का ऐलान

JPSC Protest: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से डटे अभ्यर्थियों ने अब सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के तीन दौर बेनतीजा रहने के बाद सोमवार को छात्रों ने झारखंड विधानसभा के घेराव का फैसला किया है। छात्रों का विधानसभा मार्च सुबह करीब 10 बजे शुरू होगा। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने विधानसभा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं को लेकर छात्र 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ सरकार छात्रों से बातचीत के जरिए विवाद को समाप्त करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक दोनों पक्षों के बीच किसी अंतिम सहमति पर बात नहीं बन सकी है।

रविवार को भी सरकार की ओर से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की गई। सरकार का दावा है कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें मान ली गई हैं। इसी बीच झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे की खबर सामने आई। सरकार की ओर से इसे छात्रों की कई मांगों पर कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आंदोलनकारी छात्र अभी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

पूरे विवाद में सबसे बड़ा पेंच कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग को लेकर है। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। उनका आरोप है कि केवल प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई या अधिकारियों के इस्तीफे से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। छात्र चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए, जिस पर अभ्यर्थियों को भरोसा हो। दूसरी ओर सरकार की ओर से छात्रों की अधिकांश मांगें स्वीकार किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन CBI जांच के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है। यही मुद्दा अब आंदोलन के आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजह बन गया है।

विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद रांची प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह अलर्ट है। विधानसभा के आसपास कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बैरिकेडिंग के साथ-साथ कंटीले तार लगाए गए हैं ताकि प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि छात्रों की ओर से भी अपने साथियों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें प्रदर्शनकारियों से पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ किसी भी तरह की झड़प से बचने की अपील की गई है। छात्रों से कहा गया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएं और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता का हिस्सा न बनें। आंदोलन के दौरान यातायात बाधित नहीं करने और आम लोगों तथा राहगीरों को परेशानी से बचाने की भी अपील की गई है।

छात्र नेताओं ने साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति प्रदर्शन के दौरान हंगामा या झड़प करने की कोशिश करता है तो दूसरे प्रदर्शनकारी उसका साथ न दें। साथ ही किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा नहीं करने और संदिग्ध स्थिति में प्रशासन को सूचना देने की अपील की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका मकसद अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रखना है।

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रविवार से ही झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचने लगे। पुरानी विधानसभा परिसर और मोरहाबादी मैदान के आसपास अभ्यर्थियों की भीड़ बढ़ती गई। छात्रों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि प्रदर्शन के लिए बनाया गया पंडाल भी छोटा पड़ गया। इससे साफ है कि आंदोलन अब केवल रांची तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से अभ्यर्थी इसमें शामिल हो रहे हैं।

इसी बीच जमशेदपुर में भी रविवार आधी रात से निषेधाज्ञा यानी धारा 163 लागू कर दी गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। रांची जिला प्रशासन ने भी छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के उग्र प्रदर्शन से दूर रहें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।

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वहीं प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया है कि झारखंड के विभिन्न जिलों से रांची आने वाले सैकड़ों छात्रों को पुलिस रास्ते में रोक रही है। छात्रों का कहना है कि सरकार एक तरफ बातचीत के जरिए समस्या सुलझाने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ आंदोलन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुंच रहे अभ्यर्थियों को रोका जा रहा है।

अब सभी की नजर सोमवार को होने वाले विधानसभा मार्च पर है। एक तरफ छात्र CBI जांच समेत अपनी बाकी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ सरकार का दावा है कि उनकी लगभग सभी मांगें मान ली गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विधानसभा मार्च के बाद सरकार और छात्रों के बीच कोई नया रास्ता निकलता है या फिर JPSC-JSSC विवाद और लंबा खिंचता है। फिलहाल छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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