
Lucknow Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटना के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह बरेली के परियोजना निदेशक नवरत्न को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे पर वसूला जा रहा टोल भी अगले आदेश तक पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और मामले की निष्पक्ष जांच को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने प्रेस वार्ता में बताया कि सड़क धंसने के कारणों की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम अगले दो दिनों में घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। टीम निर्माण की गुणवत्ता, डिजाइन, मिट्टी की स्थिति और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी तथा एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट NHAI को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
NHAI ने इस मामले में केवल मौजूदा परियोजना निदेशक पर ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि निर्माण कार्य और निगरानी में यदि कोई लापरवाही हुई है तो उसके लिए उनका पक्ष क्या है।
निर्माण कार्य करने वाली एजेंसी PNC के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। NHAI ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही सड़क की मरम्मत, यातायात व्यवस्था में हुए अतिरिक्त खर्च और टोल बंद रहने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही कराई जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे पर फिलहाल लगभग 5 किलोमीटर लंबा डायवर्जन बनाया गया है, ताकि वाहनों की आवाजाही प्रभावित न हो। उनका दावा है कि डायवर्जन के बावजूद ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा है और वाहनों की संख्या में भी कोई बड़ी कमी नहीं आई है। NHAI का कहना है कि 6 अगस्त तक मरम्मत का पूरा काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद सड़क की दोबारा सुरक्षा जांच की जाएगी।
सड़क धंसने की इस घटना ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक माना जाता है, इसलिए घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। ऐसे में IIT खड़गपुर की जांच रिपोर्ट बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि सड़क धंसने की वजह निर्माण में तकनीकी खामी थी, डिजाइन की समस्या थी या फिर निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया।
फिलहाल NHAI ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक टोल वसूली शुरू नहीं की जाएगी। वहीं दोष तय होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।



