साहित्य परिक्रमा के नए कलेवर का विमोचन, कई राज्यों और भारतीय भाषाओं में प्रकाशन की तैयारी

Lucknow News : लखनऊ में ‘साहित्य परिक्रमा’ पत्रिका के नूतन कलेवर का विमोचन हुआ। प्रो. रजनी मान ने कई राज्यों और भारतीय भाषाओं में पत्रिका के प्रकाशन की तैयारी की जानकारी दी।

Lucknow News  : अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास की पत्रिका ‘साहित्य परिक्रमा’ के नूतन कलेवर का विमोचन शनिवार को सेक्टर-एन, आशियाना स्थित चेतना डेंटल साहित्य केंद्र में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, इतिहासकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी शामिल हुए। दीप प्रज्वलन, वाणी वंदना और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

कई राज्यों और भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होगी पत्रिका

‘साहित्य परिक्रमा’ की निदेशक एवं मुख्य अतिथि प्रो. रजनी मान ने कहा कि पाठकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पत्रिका के पेज और कवर में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि अब पत्रिका को नियमित रूप से और समय पर पाठकों तक पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा।

उन्होंने बताया कि पत्रिका का प्रकाशन दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों में भी किए जाने की तैयारी है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी इसे प्रकाशित करने की योजना है। आगामी अंकों में लोकभाषा, लोककला, इतिहास और साहित्य को जोड़ते हुए विभिन्न समसामयिक और गंभीर विषयों पर सामग्री प्रकाशित की जाएगी।

साहित्य समाज को देता है दिशा : सुशील चंद्र त्रिवेदी

अखिल भारतीय साहित्य परिषद न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र त्रिवेदी ने कहा कि साहित्य का महत्व हर दौर में रहा है। आजादी के आंदोलन के समय से लेकर वर्तमान युग तक साहित्य ने समाज को दिशा देने और विचारों को अभिव्यक्ति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि ‘साहित्य परिक्रमा’ का समाज और बुद्धिजीवी वर्ग में महत्वपूर्ण स्थान है। पत्रिका का नियमित प्रकाशन जरूरी है, ताकि पाठकों तक समय पर साहित्यिक सामग्री पहुंचे और विचारों का निरंतर आदान-प्रदान होता रहे।

युवाओं और समाज में साहित्य की भूमिका पर चर्चा

राष्ट्रीय महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रख्यात दंत चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ. संजीव अवस्थी ने पत्रिका के नए कलेवर के विमोचन पर प्रसन्नता जताई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अवध प्रांत अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन अवध प्रांत के प्रदेश प्रचार प्रमुख अविनाश चंद्र मिश्र ने किया। डॉ. बलजीत श्रीवास्तव और निर्भय गुप्ता समेत अन्य वक्ताओं ने भी विचार रखे।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव अनिल दुबे, शिवशंकर अवस्थी, डॉ. रितेश दुबे, सुरेंद्र पांडेय, पत्रकार रमाशंकर शुक्ल, आनंद मिश्र समेत अनेक साहित्यकार मौजूद रहे। वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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