
Pratapgarh Yogini Ekadashi Program: योगिनी एकादशी के पावन अवसर पर महुली स्थित वृद्धाश्रम परिसर में सर्वोदय सद्भावना संस्थान के तत्वावधान में सेवा एवं सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. अंकिता पांडे द्वारा आश्रम में रह रहे सभी वृद्ध महिला एवं पुरुषों को आम, केला तथा दक्षिणा भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास ने योगिनी एकादशी और चातुर्मास के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आषाढ़ मास की दशमी के दिन भगवान श्री जगन्नाथ अपने मौसी घर गुंडीचा मंदिर से मुख्य मंदिर जगन्नाथपुरी वापस पधारते हैं और इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीमन्नारायण एक स्वरूप में क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर योगनिद्रा में रहते हैं, जबकि दूसरे स्वरूप में वामनावतार के दौरान दिए गए वचन के अनुसार राजा बलि के यहां निवास करते हैं।
उन्होंने कहा कि आज से कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक किया गया दान अक्षय फल देने वाला माना गया है। चातुर्मास के दौरान संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर भगवान की कथा, भजन-कीर्तन और धर्म प्रचार के माध्यम से लोगों को सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करते हैं। उन्होंने लोगों से इस अवधि में मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन का त्याग करने, असत्य से दूर रहने तथा भजन, कथा श्रवण और सत्संग में समय व्यतीत करने का आह्वान किया।
धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे ने वृद्धाश्रम के कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ बुजुर्गों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने समाज से अपील की कि माता-पिता की सेवा स्वयं करें, ताकि उन्हें वृद्धाश्रम का सहारा न लेना पड़े। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” की भावना भारतीय संस्कृति की मूल पहचान है।
कार्यक्रम में पंडित दिनेश शर्मा, डॉ. महेंद्र सिंह (प्रतिनिधि, पूर्व मंत्री एवं एमएलसी), रामचंद्र उमरवैश्य, राजा उमरवैश्य, रामानुज दास, अजय उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं वृद्धाश्रम के कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन बुजुर्गों के सम्मान और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं सुखमय जीवन की कामना के साथ किया गया।



