
Sports News: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खाते में दूसरा पदक जुड़ गया है। मणिपुर के स्टार वेटलिफ्टर ऋषिकांता सिंह चनमबम ने पुरुष 60 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने स्नैच राउंड में 121 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
हालांकि बाद में मलेशिया के मोहम्मद अनिक कासदान ने इस रिकॉर्ड की बराबरी कर ली, लेकिन ऋषिकांता का प्रदर्शन पूरे मुकाबले में चर्चा का केंद्र रहा।
कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर जीता सिल्वर
ऋषिकांता ने स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 143 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया। इस तरह उन्होंने कुल 264 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। क्लीन एंड जर्क में 148 और 151 किलोग्राम के उनके अगले दोनों प्रयास सफल नहीं हो सके।
भारत का दूसरा पदक
ऋषिकांता से पहले भारत को पहला पदक पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग में मिला था, जहां बिहार के झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर देश का खाता खोला था। ऋषिकांता के सिल्वर के साथ भारत की पदक संख्या दो हो गई।
2025 बना करियर का टर्निंग पॉइंट
5 जुलाई 1998 को मणिपुर में जन्मे ऋषिकांता सिंह ने 2025 में अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। उन्होंने उस प्रतियोगिता में कुल 271 किलोग्राम (120 किग्रा स्नैच + 151 किग्रा क्लीन एंड जर्क) वजन उठाया था और सीधे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई किया था।
इंडियन आर्मी ने निखारी प्रतिभा
ऋषिकांता की प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में इंडियन आर्मी के स्पोर्ट्स प्रोग्राम की अहम भूमिका रही। अनुशासित प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय कोचिंग की बदौलत उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया।
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मणिपुर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया
मणिपुर को भारतीय वेटलिफ्टिंग की नर्सरी माना जाता है। मीराबाई चानू और कुंजारानी देवी जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए ऋषिकांता अब कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले राज्य के प्रमुख वेटलिफ्टरों में शामिल हो गए हैं।


