Ayodhya News : राम मंदिर ट्रस्ट के तीन पदों के लिये कई दावेदार, अयोध्या से दिल्ली तक मंथन

Ayodhya News : 22 जुलाई को होने वाली श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक से पहले तीन रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर मंथन तेज है। स्थानीय संतों और विहिप की भूमिका पर सबकी नजर।

Ayodhya News : श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 22 जुलाई को प्रस्तावित बैठक से पहले ट्रस्ट के तीन रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर हलचल तेज हो गई है। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद होने जा रही यह पहली नियुक्ति प्रक्रिया केवल रिक्तियां भरने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे ट्रस्ट की भावी प्रशासनिक संरचना, शक्ति संतुलन और कार्यप्रणाली तय करने वाले अहम फैसले के रूप में देखा जा रहा है।

अयोध्या से लेकर दिल्ली तक संत समाज, स्थानीय प्रतिनिधियों, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और संघ परिवार के स्तर पर लगातार विचार-विमर्श और संपर्क अभियान जारी हैं। माना जा रहा है कि 22 जुलाई की बैठक में ट्रस्ट के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

तीन पद खाली, कई नाम चर्चा में

पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में दो पद रिक्त हुए, जबकि वरिष्ठ ट्रस्टी एवं अयोध्या राजपरिवार से जुड़े विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद तीसरा पद खाली हो गया।

इन रिक्त पदों के लिए कई नाम चर्चाओं में हैं। संभावित दावेदारों में यतींद्र मिश्र, विशंभर नाथ अरोड़ा, आचार्य मिथिलेश नंदनी शरण महाराज और महंत राजकुमार दास के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। वहीं महासचिव पद के लिए विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा का नाम भी चर्चा में है। हालांकि, ट्रस्ट या विहिप की ओर से किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

स्थानीय संतों ने बढ़ाया प्रतिनिधित्व का मुद्दा

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच स्थानीय संत समाज ने ट्रस्ट में अपनी भागीदारी बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। 8 जुलाई को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने अयोध्या के प्रमुख संतों के साथ बैठक कर रिक्त पदों और मंदिर प्रबंधन में संतों की भूमिका पर चर्चा की।

बैठक में संतों ने मांग रखी कि राम मंदिर आंदोलन में लंबे समय तक सक्रिय रहे स्थानीय संतों को ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।

स्थानीय संत और संगठन के बीच संतुलन की चुनौती

सूत्रों के अनुसार, पहले ट्रस्ट में अयोध्या के चार प्रतिनिधि थे, लेकिन वर्तमान में दो पद रिक्त होने और कुछ वरिष्ठ सदस्यों की सीमित सक्रियता के कारण स्थानीय प्रतिनिधित्व कम हुआ है। दूसरी ओर, संघ और विहिप प्रशासनिक दक्षता तथा संगठनात्मक समन्वय को मजबूत बनाए रखने के पक्षधर हैं।

ऐसे में ट्रस्ट के सामने स्थानीय संत समाज की अपेक्षाओं और संगठनात्मक नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

दिल्ली की बैठक के बाद हो सकता है फैसला

19 और 20 जुलाई को दिल्ली में विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति की बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था, महासचिव पद और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद 22 जुलाई को अयोध्या में होने वाली श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में तीनों रिक्त पदों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

अब प्रशासन और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

राम मंदिर निर्माण का प्रमुख चरण पूरा होने के बाद ट्रस्ट की प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। अब मंदिर के सुचारु संचालन, श्रद्धालुओं के प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में आगामी बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों को ट्रस्ट के अगले चरण की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

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