Supreme Court on Illegal Buildings : दिल्ली-NCR में अवैध इमारतों का ऑडिट, MCD-GMDA अधिकारियों को तलब, व्यक्तिगत जवाबदेही तय होगी

Supreme Court on Illegal Buildings : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में अवैध इमारतों पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र ऑडिट के आदेश दिए हैं। MCD और GMDA के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है और दोषी अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी गई है।

Supreme Court on Illegal Buildings : दिल्ली-एनसीआर में लगातार सामने आ रही अवैध इमारतों, भवन गिरने और आग जैसी घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने दिल्ली और NCR के जोखिम वाले इलाकों में स्वतंत्र स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का आदेश दिया है। साथ ही दिल्ली नगर निगम (MCD) और गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों का पालन करने में विफल पाए गए तो उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।

MCD की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराज़गी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि 20 मई को दिए गए आदेश में लाजपत नगर और सरोजिनी नगर जैसे क्षेत्रों में खतरनाक अवैध निर्माणों की ओर ध्यान दिलाया गया था। इसके बावजूद नगर निगम ने केवल नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित रखी।

पीठ ने टिप्पणी की कि अदालत को उम्मीद थी कि अधिकारी प्रभावी कार्रवाई करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब अदालत सख्त आदेश पारित करेगी, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

MCD कमिश्नर और GMDA वाइस चेयरमैन होंगे पेश

सुप्रीम कोर्ट ने MCD कमिश्नर और GMDA के वाइस चेयरमैन को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने उनसे यह बताने को कहा है कि 20 मई के आदेश के बाद अवैध निर्माणों और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर क्या ठोस कदम उठाए गए।

IIT दिल्ली के विशेषज्ञ करेंगे निरीक्षण

कोर्ट ने दिल्ली के मालवीय नगर, साकेत और लाजपत नगर में जमीनी निरीक्षण के लिए एक विशेषज्ञ टीम गठित की है। इस टीम में IIT दिल्ली के वरिष्ठ प्रोफेसर, ड्राफ्ट्समैन, MCD अधिकारी और कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा शामिल होंगे।

इसके अलावा लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना को देखते हुए वहां भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

हाल की घटनाओं पर कोर्ट की चिंता

एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि हाल के महीनों में हौज रानी में आग, सैदुलजाब में अवैध इमारत गिरने और साकेत मेट्रो स्टेशन के पास भवन ढहने जैसी घटनाएं पहले से जताई गई चिंताओं को सही साबित करती हैं।

उन्होंने अदालत को आगाह किया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो लाजपत नगर जैसे इलाकों में भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई शिकायतें पहले ही प्राप्त हो चुकी हैं।

‘सिर्फ दिखावे की कार्रवाई’ पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवर्तन एजेंसियां केवल बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, जबकि नियमों के उल्लंघन की अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो रही है। अदालत ने इसे “सिर्फ दिखावे की कार्रवाई” बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी शीर्ष अधिकारियों की भी तय की जाएगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कई स्थानों पर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) के आदेश अंतिम रूप से पारित होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया।

अन्य राज्यों से भी मांगी रिपोर्ट

दिल्ली और हरियाणा के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से भी अवैध निर्माणों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। वहीं पटना नगर निगम के वर्तमान और पूर्व नगर आयुक्तों से भी उनके कार्यकाल में की गई प्रवर्तन कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।

पहले भी जता चुका है सुप्रीम कोर्ट चिंता

20 मई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्वीकृत नक्शे से अधिक मंजिलें बनाना इमारतों को संरचनात्मक रूप से असुरक्षित बना देता है। अदालत ने यह भी कहा था कि बड़े पैमाने पर होने वाले ऐसे उल्लंघन अक्सर बिल्डरों और स्थानीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत की ओर संकेत करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट अब देशभर में अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा और नगर निकायों की जवाबदेही से जुड़े मामलों की लगातार निगरानी कर रहा है।

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